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Dehradun News: नगर निगम को सख्ती से चलाना होगा बड़ा अभियान, तभी मिलेगा सही मुकाम
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Iपॉलिथीन और प्लास्टिक मुक्त शहर के लिए करनी होगी कड़ी मशक्कत, लोगों को भी लेना होगा साथI
दून को स्वच्छता के शिखर पर लाने के लिए जरूरी है, शहर को पॉलिथीन और प्लास्टिक मुक्त बनाया जाए। इसके लिए नगर निगम को कड़ी मशक्कत करनी होगी। केवल छोटे दुकानदारों, कारोबारियों, रेहड़ी-ठेली तक सीमित न रखते हुए, लोगों को साथ लेकर नगर निगम को सख्ती से बड़ा अभियान चलाना होगा। तभी शहर स्वच्छता रैंकिंग में शिखर पर पहुंच सकता है।
पॉलिथीन और प्लास्टिक मानव जाति के लिए बड़ी चुनौती है। नष्ट न होने के कारण यह भूमि की उर्वरा क्षमता को खत्म करने के साथ ही भूजल स्तर को भी घटा रहा है। इसके प्रयोग से त्वचा और सांस के साथ ही कैंसर का खतरा भी बढ़ा है। सीवर लाइन जाम का सबसे बड़ा कारण भी पॉलिथीन ही है। इस पर पूर्ण प्रतिबंध से ही शहर को पॉलिथीन और प्लास्टिक मुक्त शहर की श्रेणी में लाया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट तक कई बार इस पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश हो चुके हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर आज तक इसको लेकर ईमानदारी से कोई प्रयास नहीं हुए हैं।
अभियान जरूर चलाए जाते हैं, लेकिन यह केवल छोटे दुकानदारों, कारोबारियों, रेहड़ी-ठेली वालों तक ही सीमित रहते हैं। इंदौर जैसे शहर ने सख्ती दिखाई तो आज उनके 27 बाजार पॉलिथीन और प्लास्टिक मुक्त हो चुके हैं। दून में भी यह संभव हो सकता है। इस संबंध में जनजागरूकता अभियान की भी जरूरत है।
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Iदेहरादून कैंट से भी सबक नहीं ले रहा नगर निगमI
देहरादून कैंट ने प्लास्टिक कचरे के समाधान के लिए जगह-जगह कचरा बैंक स्थापित किए हैं। यहां लोगों से तीन रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से प्लास्टिक कचरा जैसे पॉलिथीन बैग, प्लास्टिक के कट्टे, रैपर आदि खरीदे जा रहे हैं। इस कचरे को रिसाइकिल कर टाइल, बोर्ड, गमले आदि बनाए जा रहे हैं। कैंट ने हर माह 70 से 100 टन तक पॉलिथीन कचरा खरीदने का लक्ष्य रखा है। इसे नगर निगम भी लागू करे तो अच्छे परिणाम मिल सकते हैं।
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Iपॉलिथीन पर रोक लगाने के लिए नगर निगम की ओर से समय-समय पर अभियान चलाए जाते हैं। इसके तहत बड़ी मात्रा में चालान भी किए जाते हैं और पॉलिथीन जब्त किया जाता है। लोगों को भी चाहिए कि वह पॉलिथीन के दुष्प्रभावों से अवगत हों और इसके प्रयोग से परहेज करें, जिससे शहर को पॉलिथीन मुक्त बनाया जा सके।
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I- डॉ. अविनाश खन्ना, मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारीI
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दून को स्वच्छता के शिखर पर लाने के लिए जरूरी है, शहर को पॉलिथीन और प्लास्टिक मुक्त बनाया जाए। इसके लिए नगर निगम को कड़ी मशक्कत करनी होगी। केवल छोटे दुकानदारों, कारोबारियों, रेहड़ी-ठेली तक सीमित न रखते हुए, लोगों को साथ लेकर नगर निगम को सख्ती से बड़ा अभियान चलाना होगा। तभी शहर स्वच्छता रैंकिंग में शिखर पर पहुंच सकता है।
पॉलिथीन और प्लास्टिक मानव जाति के लिए बड़ी चुनौती है। नष्ट न होने के कारण यह भूमि की उर्वरा क्षमता को खत्म करने के साथ ही भूजल स्तर को भी घटा रहा है। इसके प्रयोग से त्वचा और सांस के साथ ही कैंसर का खतरा भी बढ़ा है। सीवर लाइन जाम का सबसे बड़ा कारण भी पॉलिथीन ही है। इस पर पूर्ण प्रतिबंध से ही शहर को पॉलिथीन और प्लास्टिक मुक्त शहर की श्रेणी में लाया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट तक कई बार इस पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश हो चुके हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर आज तक इसको लेकर ईमानदारी से कोई प्रयास नहीं हुए हैं।
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अभियान जरूर चलाए जाते हैं, लेकिन यह केवल छोटे दुकानदारों, कारोबारियों, रेहड़ी-ठेली वालों तक ही सीमित रहते हैं। इंदौर जैसे शहर ने सख्ती दिखाई तो आज उनके 27 बाजार पॉलिथीन और प्लास्टिक मुक्त हो चुके हैं। दून में भी यह संभव हो सकता है। इस संबंध में जनजागरूकता अभियान की भी जरूरत है।
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Iदेहरादून कैंट से भी सबक नहीं ले रहा नगर निगमI
देहरादून कैंट ने प्लास्टिक कचरे के समाधान के लिए जगह-जगह कचरा बैंक स्थापित किए हैं। यहां लोगों से तीन रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से प्लास्टिक कचरा जैसे पॉलिथीन बैग, प्लास्टिक के कट्टे, रैपर आदि खरीदे जा रहे हैं। इस कचरे को रिसाइकिल कर टाइल, बोर्ड, गमले आदि बनाए जा रहे हैं। कैंट ने हर माह 70 से 100 टन तक पॉलिथीन कचरा खरीदने का लक्ष्य रखा है। इसे नगर निगम भी लागू करे तो अच्छे परिणाम मिल सकते हैं।
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Iपॉलिथीन पर रोक लगाने के लिए नगर निगम की ओर से समय-समय पर अभियान चलाए जाते हैं। इसके तहत बड़ी मात्रा में चालान भी किए जाते हैं और पॉलिथीन जब्त किया जाता है। लोगों को भी चाहिए कि वह पॉलिथीन के दुष्प्रभावों से अवगत हों और इसके प्रयोग से परहेज करें, जिससे शहर को पॉलिथीन मुक्त बनाया जा सके।
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I- डॉ. अविनाश खन्ना, मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारीI