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ब्रह्मांड के अनसुलझे रहस्यों को जानने के लिए बनाई जा रही टेलीस्कोप, जानिए इसकी खासियत

Sun, 20 Oct 2019 11:06 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal नरेश कुमार, अमर उजाला, नैनीताल
नरेश कुमार, अमर उजाला, नैनीताल Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sun, 20 Oct 2019 11:06 AM IST
सार

  • ‘चिकित्सा के क्षेत्र में भी बदलाव लाएगा टीएमटी’

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TMT Telescope being made to unravel the unsolved mysteries of the universe
प्रतीकात्मक

विस्तार

ब्रह्मांड के अनसुलझे रहस्यों को जानने के लिए बनाई जा रही 30 मीटर टेलीस्कोप (टीएमटी) खगोल वैज्ञानिकों के लिए मददगार तो होगी ही, साथ ही वैज्ञानिकों के दावों पर यकीन करें तो भविष्य में इस टेलीस्कोप के निर्माण में उपयोग की गई तकनीक चिकित्सा के क्षेत्र में भी मील का पत्थर साबित होगी।

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उत्तराखंड प्रशासन अकादमी में आयोजित कार्यशाला में पहुंचे खगोल वैज्ञानिकों का दावा है कि 30 मीटर टेलीस्कोप के निर्माण में प्रयोग की जा रही तकनीक से भविष्य में मेडिकल के क्षेत्र में भी आधुनिक उपकरणों का निर्माण किया जा सकता है। इससे मनुष्य के शरीर के भीतर होने वाले परिवर्तनों का आसानी से पता लगा सकेंगे। 
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टीएमटी के एसोसिएट प्रोग्राम डॉयरेक्टर डॉ. राम प्रकाश ने बताया कि मौजूदा समय में मेडिकल के क्षेत्र में कई ऐसे उपकरणों का प्रयोग हो रहा है, जो पूर्व में किसी न किसी रूप में खगोलीय अध्ययन के लिए बनाए गए थे, उनमें मामूली रूप से परिवर्तन कर मेडिकल संबंधी अध्ययन के लिए बनाया गया है।
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बताया कि मौजूदा समय में उपयोग में लाया जा रहा जीपीएस सिस्टम पूरी तरह से आकाशीय तारों पर निर्भर है। डॉ. राम प्रकाश का दावा है कि टीएमटी से होने वाले अध्ययन के बाद जीपीएस सिस्टम से मिलने वाले आंकड़े और भी अधिक सटीक मिलेंगे।

दूसरे ग्रह की खोज वैज्ञानिकों की होगी प्राथमिकता

मूलरूप से पिथौरागढ़ निवासी और टीएमटी परियोजना में आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) की ओर से प्रतिनिधित्व कर रहे डॉ. जीवन पांडे बताते हैं कि टीएमटी से अध्ययन के बाद ब्रह्मांड को और भी अधिक गहनता से जान सकेंगे। कहा कि इसके बाद दूसरे ग्रह (जहां जीवन की संभावनाएं हैं) की खोज वैज्ञानिकों की पहली प्राथमिकता होगी।

डॉ. पांडे ने बताया कि अभी तक जिन दूरबीनों से ब्रह्मांड का अध्ययन किया जा रहा है, उनमें ब्रह्मांड के अधिकतर तारों, ग्रहों और पिंडों की साफ तस्वीर नहीं मिलती हैं। इस कारण अधिकतर खोज अपने मुकाम तक नहीं पहुंचती थी।

टीएमटी में अडॉप्टिव ऑपटिक्स तकनीक का प्रयोग कर तारों के चारों ओर घूम रहे पिंडों की आंतरिक हलचल, उनके वायुमंडल और संरचना का गहनता से अध्ययन किया जा सकेगा। इससे पता चल सकेगा कि क्या उन ग्रहों और पिंडों में जीवन के आवश्यक कारक मौजूद हैं कि नहीं।

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