गले में तार का फंदा जकड़े होने से सांसत में बाघिन की जान, नहीं हो पा रही ट्रैंक्यूलाइज
- ट्रैंक्यूलाइज करने के लिए मुर्गे, बकरियों और कुत्ते तक को बांधा
- सुरई रेंज में अपने दो शावकों के साथ घूम रही बाघिन, पकड़ में नहीं आ रही बाघिन
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उत्तराखंड के खटीमा में सुरई रेंज के जंगल में गले में तार का फंदा जकड़े होने से एक बाघिन की जान सांसत में है। विश्व प्रकृति निधि (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) की टीम इसको फंदा मुक्त करने के लिए बाघिन को ट्रैंक्यूलाइज करने की कोशिश में है लेकिन बाघिन ट्रेंक्यूलाइजिंग गन के निशाने पर नहीं आ रही है।
वन विभाग और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम मचान बनाने के साथ ही कई जगहों पर मुर्गे, बकरियों, कुत्तों आदि बांधकर बाघिन को ट्रेंक्यूलाइजिंग गन के निशाने पर लेने की कोशिश कर चुकी है लेकिन बाघिन किसी लालच में नहीं रही है।
वह मचान से फासला बनाकर निकल जाती है। जानकार बाघिन को फिलहाल स्वस्थ बता रहे हैं। बाघिन की उम्र करीब 10 से 15 साल के बीच बताई गई है। उसके साथ उसके दो बच्चे भी घूम रहे हैं जिनकी सुरक्षा को लेकर वन महकमे की नींद उड़ी हुई है।
सुरई रेंज में दो शावकों के साथ घूम रही बाघिन को डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम पशु चिकित्सकों के साथ ट्रेक्यूलाइज करने में जुटी है। ठंड में बाघिन को इतनी परेशानी नहीं थी, लेकिन अब गर्मी बढ़ने के साथ ही गले का फंदा बाघिन को नुकसान पहुंचा सकता है। फिलहाल बाघिन और उसके बच्चे स्वस्थ हैं।
- बाबू लाल, उप प्रभागीय वनाधिकारी
बैजनाथ रेंज में मादा तेंदुए की निमोनिया से मौत
बैजनाथ रेंज के लौबांज गांव में रविवार को एक मादा तेंदुआ खेत में मृत पड़ा मिला। तेंदुए की निमोनिया से मौत होनी बताई जा रही है। वन विभाग ने पोस्टमार्टम के बाद शव को जलाकर नष्ट कर दिया।
लौबांज के ग्रामीणों को रविवार सुबह खेत में तेंदुआ दिखा। इससे ग्रामीण दहशत में आ गए। ग्रामीणों ने हल्ला कर उसे भगाने का प्रयास किया, लेकिन तेंदुआ अपनी जगह से हिला तक नहीं। इस पर ज्येष्ठ उप ब्लॉक प्रमुख बहादुर सिंह कोरंगा ने वन रेंजर बैजनाथ को इसकी सूचना दी।
वन रेंजर हरीश खर्कवाल वन विभाग की टीम के साथ मौके पर पहुंचे। टीम मृत तेंदुए को रेंज कार्यालय ले आई। यहां वन विभाग के पशु चिकित्सा अधिकारी पीके पाठक से तेंदुए का पोस्टमार्टम किया।
बताया कि मादा तेंदुए की उम्र करीब छह साल है। शरीर पर किसी तरह के घाव के निशान नहीं मिले। उसकी निमोनिया से मौत हुई है। इसके बाद शव को जलाकर नष्ट कर दिया गया।