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भारत में तिब्बती फैला रहे दलाई लामा का संदेश
नलिनी गुसाईं/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 08 Jan 2015 01:52 PM IST
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जीवों पर दया करने का संदेश देते हुए तिब्बती लोग अब मांसाहार त्यागकर शाकाहारी बनने की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।
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मांसाहार छोड़ने की सलाह
दूसरों को भी मांसाहार छोड़ने की सलाह दी जा रही है। तिब्बती कैलेंडर के मुताबिक तिब्बती अब हर माह की चार खास तारीखों को मांस नहीं खाते।
इन दिनों में मांसाहारी व्यंजन की दुकान भी बंद रखते हैं। इसके अलावा प्रमुख तिब्बती त्योहार ‘लोसर’ पर पहले जहां मांसाहार बनता था, वहां अब शाकाहारी खाना तैयार किया जाता है।
क्लेमेंटटटाउन तिब्बती सभा के कोषाध्यक्ष श्रींग डोलमा के मुताबिक अध्यात्मिक गुरु दलाई लामा का संदेश है कि तिब्बती लोगों को शाकाहारी बनना चाहिए। तिब्बत के मुकाबले भारत का मौसम गर्म है, यहां मांस खाने की जरूरत नहीं है।
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ऐसे में जीवों की हत्या न की जाए। तिब्बती निर्वासित सरकार की ओर से दून में एक प्रतिनिधि मंडल नियुक्त किया गया है, जो लोगों को शाकाहार के लिए प्रेरित कर रहा है। हम लोग भी अपने लोगों से शाकाहारी बनने की अपील कर रहे हैं।
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कई लोगों ने शाकाहार अपनाया भी है। स्वर्ण जयंती कार्यक्रम में जुटे पांच देशों में रह रहे तिब्बती लोगों के लिए केवल शाकाहारी भोजन ही तैयार किया जा रहा है।
श्रींग छयोदोन ने बताया कि माह की चार शुभ तारीखों को हम पूरी तरह शाकाहारी भोजन ग्रहण करते हैं। मांस के व्यंजनों की दुकान बंद रखते हैं। संभव हो तो व्रत भी रखते हैं।
सालभर में पड़ने वाले लोसार और देवलोक मंदिर स्थापना दिवस पर भी अब मांसाहारी खाना नहीं बनता। तिब्बत से आए लोग ना सिर्फ भारत बल्कि दूसरे देशों में भी शाकाहार के प्रति लोगों को जागरूक कर रहे हैं।
माह की इन तारीखों में मांसाहार पर रोक
8 तारीख - तारा देवी की पूजा के लिए। इन्हें तिब्बती लोग डोलमा भी कहते हैं।
10 तारीख - गुरु पद्मा संभव के लिए।
15 तारीख - बुद्ध भगवान के जन्मदिवस पर।
30 तारीख - अमावस्या पर विश्व शांति की पूजा के लिए।