टिहरी: बिजली के तार से चिपट गईं एक परिवार की तीन जिंदगियां
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उत्तराखंड के टिहरी में एक दर्दनाक हादसे से खेतों में झूलती विद्युत लाइन की चपेट में आकर एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई जबकि दो महिलाएं झुलस गईं। ग्रामीणों ने तहसील प्रशासन से ऊर्जा निगम के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। घटना टिहरी के हिंदाव क्षेत्र स्थित बडियार डडोली की है।
विभाग की ओर से मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख और घायलों को 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की बात कही गई है।
मंगलवार सुबह करीब नौ बजे हिंदाव की ग्राम पंचायत बडियार डडोली के कई ग्रामीण खेतों में रोपाई के लिए थात तोक जा रहे थे। खेत जाने के रास्ते में 11 हजार केवी लाइन का विद्युत तार टूटकर झूल रहा था। करंट की चपेट में भगवान सिंह नेगी (54) पुत्र गैणा सिंह निवासी बडियार डडोली में आ गए।
बचाने की कोशिश में तार से चिपक गईं दो महिलाएं
भगवान सिंह को बचाने के लिए परिवार की दो महिलाएं कुन्का देवी (65) पत्नी भाग सिंह, आशा देवी (32) पत्नी राम सिंह ने कोशिश की तो वे भी तार से चिपक गईं। मौके पर ही तीनों की मौत हो गई।
बताया जा रहा है कि इसी गांव की हुकम देई पत्नी बचन सिंह, कुंवर देई पत्नी शेर सिंह ने भी तीनों को तार से छुड़ाने की कोशिश में झुलस गई। सूचना पर पुलिस और एसडीएम जगदीश लाल मौके पर पहुंचे।
झुलसी महिलाओं को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पिलखी में भर्ती कराया गया। डॉक्टर श्याम विजय ने बताया कि घायलों की स्थिति अब सामान्य है। क्षेत्र के ग्रामीण दलीप सिंह नेगी, रघुवीर सिंह ने ऊर्जा निगम के खिलाफ लापरवाही का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।
इनका है कहना
घटना के कारणों की जांच की जा रही है। विद्युत तारों को जोड़ने के लिए मजदूर लगा दिए गए हैं।
-शक्ति प्रसाद, अधिशासी अभियंता, ऊर्जा निगम टिहरी
पहले भी हुए हादसे, पढ़िए कब और कैसे
बिजली के झूलते तारों की वजह से तीन लोगों की मौत का यह पहला मामला नहीं है। एक वर्ष के दौरान की ही बात करें तो देवप्रयाग और पौड़ी में ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं। बावजूद इसके ऊर्जा निगम इन हादसों के बाद भी सबक लेने को तैयार नहीं है। आज भी कई इलाकों में बिजली के झूलते तार खतरों को आमंत्रण दे रहे हैं।
देवप्रयाग में भी हो चुकी एक मौत
श्रीनगर। देवप्रयाग क्षेत्र में एक वर्ष में करंट लगने से एक व्यक्ति की मौत हुई। जबकि एक महिला बुरी तरह से झुलस गई थी। महिला जंगल में पेड़ से घास काट रही थी। बिजली के तारों की चपेट में आने से वह बुरी तरह झुलस गई थीं।
लाइन ठीक करने के दौरान भी हुई थी मौत
विद्युत वितरण खंड पौड़ी में पिछले एक साल में बिजली के करंट की चपेट में आने से एक की मौत हो चुकी है। घटना पिछले साल अक्तूबर माह की है। सीकू निवासी रवींद्र बिजली को ठीक करने के लिए पोल पर चढ़ा हुआ था। इसी दौरान अचानक लाइन चालू होने पर करंट लगने से उसकी मौत हो गई थी।
उत्तरकाशी में चार वर्षों में 12 लोगों की गई जानें
उत्तरकाशी जनपद में बिजली की जर्जर लाइनें, बिजली के झूलते तार और खंबों से करंट लीकेज मानव जीवन के लिए खतरा बनी हुई है। चार वर्षों में ही जिले में बारह लोग करंट की चपेट में आकर काल के गाल में समा चुके हैं।
यही नहीं एक गुलदार और एक भालू की भी करंट लगने से मौत हो चुकी है। इसके बावजूद ऊर्जा निगम सबक लेने को राजी नहीं है।
ऊर्जा निगम के एई आरएल रतूड़ी ने स्वीकारा कि कुछ जगह बिजली की लाइनों को दुरुस्त किया जाना है। इसके लिए मुख्यालय प्रस्ताव भेजा गया है।
जिले में एक वर्ष से करंट लगने से हुए हादसे
11 जुलाई 2014 को पाटा गांव में करंट लगने से गुलदार की मौत।
30 मई 2014 को जोशियाड़ा में जल विद्युत निगम के लाइन मैन प्रताप सिंह की करंट लगने से मौत।
3 जुलाई 2014 को मोताड़ में बिजली की टूटी लाइन से करंट लगने से वन कर्मी जयेंद्र सिंह की मौत।
14 सितंबर 2014 को पुरोला में बिजली के झूलते तार से करंट लगने से सरदार सिंह की मौत।
चमोली जिले में तीन लोग गंवा चुके जान
चमोली जिले के पोखरी और घाट के ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली के तार जमीन छू रहे हैं। फरवरी माह में घाट क्षेत्र में एक युवक खेतों में जाते वक्त विद्युत तार से उलझने से उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया था। मार्च माह में चमोली कस्बे के समीप एक गांव में घास कटान के दौरान 14 वर्षीय बालिका की मौत हो गई थी।
11 जून को गोपेश्वर नगर के सुभाष नगर मोहल्ले में आवासीय भवन की छत पर करंट लगने से शासकीय अधिवक्ता डीएस कंडेरी की मौत हो गई थी।
इधर, ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता वीरेंद्र पंवार का कहना है कि नगर क्षेत्रों में तारों के स्थान पर केबिल बिछाने का कार्य गतिमान है। ग्रामीण क्षेत्रों में केंद्र पोषित दीन दयाल ग्राम ज्योति योजना के तहत विद्युत लाइनों के सुधारीकरण के लिए प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है।
हादसों को न्योता दे रही झूलती विद्युत लाइन
घनसाली (टिहरी)। भिलंगना ब्लॉक के एक दर्जन गांवों में झूलती विद्युत लाइनें हादसों को न्यौता दे रही है। पौखार, कोठार और अखोडी गांव में विद्युत लाइन पेड़ों से टकरा रही है। जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि प्रस्ताव देने के बाद भी ऊर्जा निगम कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
अखोड़ी के प्रधान सरोप सिंह मेहरा, सोबत लाल, कोट की प्रधान सुमन नैथानी का कहना है कि झूलते विद्युत तारों को बदलने के लिए कई बार प्रस्ताव देने के बाद भी ऊर्जा निगम कार्रवाई नहीं कर रहा है। बंगर के मदन सिंह का कहना है कि गत वर्ष आंधी-तूफान से विद्युत तार टूट गए थे, लेकिन उसी वक्त बिजली गुल होने से गांव में बड़ा हादसा होने से लोग सकुशल बच गए। ऊर्जा निगम के ईई शक्ति प्रसाद का कहना है कि यदि किसी गांव में समस्या है तो वहां के प्रधान को लिखित में शिकायत दर्ज करनी चाहिए।
नरेंद्रनगर ब्लॉक के पयालगांव, फफरवाणा, मखलोगी, और दिवाडा गांव के लोगों के लिए हाईटेंशन लाइन जी का जंजाल बनी हुई है। गांवों के आवासीय भवनों और खेतों के ऊपर से हाईटेंशन लाइन गुजर रही है। जून 2014 में पयालगांव में हाईटेंशन लाइन के करंट से पांच लोग झुलस गए थे।