कर्मचारियों के कार्यबहिष्कार से कराह रहे लोग
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शुक्रवार को 44 विभागों के तकरीबन 32 हजार कर्मचारी कार्यबहिष्कार पर रहे जिसका व्यापक असर पूरे उत्तराखंड में देखने को मिला। दफ्तरों में सन्नाटा पसरा रहा।
राजधानी के सरकारी दफ्तरों में कामकाज पूरी तरह ठप रहा। शनिवार को भी कर्मचारी काम नहीं करेंगे। पंचायत चुनाव नजदीक हैं। आचार संहिता लागू के बाद कामकाज बाधित होगा।
प्रदेश में सरकारें बदलती रहीं लेकिन ‘हड़ताली प्रदेश’ की छवि और कार्यसंस्कृति नहीं बदली है। शपथ लेने बाद हरीश रावत ने नई कार्यसंस्कृति विकसित करने की बात कही थी।
पर अब भी अधिकारियों को पहाड़ के दौरों के लिए कड़े निर्देश और चेतावनी देनी पड़ती है। मुख्यमंत्री के रुख से भी नहीं लगता है कि कर्मचारियों पर किसी तरह की कड़ाई होगी।
दो दिवसीय कार्य बहिष्कार शुरू
अच्छे दिनों का राग गुनगुना रही जनता के बुरे दिन शुक्रवार से शुरू हो गए। मिनिस्ट्रीयल कर्मचारियों ने वेतनमान संबंधी मांगों को लेकर दो दिवसीय कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया।
पहले ही दिन इसका व्यापक असर देखने को मिला। न तो जाति, आय संबंधी प्रमाण-पत्र बने और न ही लाइसेंस। लोग कलेक्ट्रेट और तहसील में भटकते रहे।
वहीं आरटीओ में सन्नाटा पसरा रहा। खिड़की बंद रही, दरवाजे पर ताले पड़े रहे। टैक्स, एनओसी, नंबर प्लेट पाने के लिए आए लोगों को भी बैरंग लौटना पड़ा।
हैरत की बात यह है कि लोगों को जानकारी देने के लिए वहां एक भी कर्मचारी नहीं था। लोग आपस में ही एक दूसरे से ऑफिस बंद होने के सवाल कर रहे थे।
कई लोग तो ऐसे थे, जो दूसरे जनपदों से आरटीओ कार्यालय संबंधी कामकाज लेकर आए थे।
तीन दिन के भीतर कैसे भेजें फार्म
मोथरोवाला की कांती देवी को अपने बेटे रोहित के लिए जाति प्रमाण पत्र लेना था। उसने नौकरी के लिए फार्म भरा है।
उन्होंने बताया कि तीन दिन के अंदर फार्म भेजना है। दो दिन कार्य बहिष्कार है। इसके बाद रविवार पड़ जाएगा।
सीएम राहत कोष के चेक तक नहीं मिले
कुछ लोगों ने बीमारों के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से आर्थिक मदद मांगी थी। इनके चेक तो पहुंच गए थे, लेकिन कार्य बहिष्कार के कारण यह चेक उन्हें मिल नहीं पाए।
बहुत से लोग शिकायती पत्र लेकर आए थे, जब उन्हें कर्मचारी नहीं मिले तो डीएम कार्यालय पहुंच शिकायती पत्र दे चलते बने।
सभा की, सरकार को कोसा
उत्तरांचल फेडरेशन आफ मिनिस्ट्रीयल सर्विसेज एसोसिएशन के बैनर तले 44 विभागों के कर्मचारियों ने दफ्तरों में दस्तखत करने के बाद परेड ग्राउंड का रुख किया।
यहां सभा कर सरकार को जी भरकर कोसा। कर्मचारियों ने ‘मुख्यमंत्री होश में आओ’, ‘मिनिस्ट्रीयलकर्मियों की वेतन विसंगति दूर करो’ आदि नारे लगाए गए।
...फिर होगा कार्य बहिष्कार, धरना
सभा में कर्मचारियों ने मांगें माने जाने तक संघर्ष की बात दोहराई। कहा कि अगर मांग न मानी गई तो पंचायत चुनाव की आचार संहिता खत्म होने के बाद फिर दो दिवसीय कार्य बहिष्कार और धरना प्रदर्शन होगा।
प्रांतीय प्रवक्ता सुभाष देवलियाल, सुनील कोठारी, आरपी जुयाल, सुशील जोशी, दीपचंद्र बुडलाकोटी, पूर्णानंद नौटियाल आदि मौजूद रहे।
पुराने ढर्रे पर ‘हड़ताली प्रदेश’ की कार्य संस्कृति
प्रदेश में सरकारें बदलती रहीं, लेकिन ‘हड़ताली प्रदेश’ की छवि और कार्यसंस्कृति नहीं बदली। अभी भी अधिकारियों को पहाड़ के दौरों पर जाने के निर्देश और चेतावनी देनी पड़ रही है।
वहीं कर्मचारी फिर से हड़ताल पर आमादा हैं। कर्मचारियों से बातचीत के लिए सरकार ने मुख्य सचिव सुभाष कुमार का जिम्मेदारी सौंपी है। हालांकि, शुक्रवार को कर्मचारी नेताओं की मुख्यमंत्री से भी बात हुई, जिसमें कोई नतीजा नहीं निकला।
मिनिस्ट्रीयल कर्मचारी दो दिन के कार्य बहिष्कार पर चले गए हैं। मुख्यमंत्री ने अमर उजाला से कहा कि कर्मचारी नेताओं को बातचीत के लिए बुलाया गया है।
सरकार उनसे बातचीत कर कोई समाधान निकालेगी। मुख्यमंत्री अपने पुराने बयानों और कर्मचारी नेताओं के साथ हुई बैठकों को याद करें तो उनका रुख बदल गया है।
मुख्यमंत्री की शपथ लेने के बाद जब कर्मचारी नेता उनका स्वागत करने पहुंचे थे तो उन्होंने हड़ताल को लेकर खरी-खरी सुनाई थी। इस बात का वादा भी लिया था कि पहले बातचीत करें फिर हड़ताल पर जाएं। जबकि ऐसा नहीं हुआ है।
कार्य बहिष्कार से पहले बृहस्पतिवार को कर्मचारी नेताओं की मुख्यमंत्री से बात भी हुई। मुख्यमंत्री ने उनका मामला कैबिनेट में ले जाने का आश्वासन भी दिया। बावजूद इसके कर्मचारी कार्यबहिष्कार पर चले गए।
कर्मचारी आन्दोलन का रास्ता न अपनाएं। सरकार कर्मचारियों की समस्याओं से अवगत है और उनके हितों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर है।
- हरीश रावत, मुख्यमंत्री