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उपेक्षा : सीटी स्कैन और एमआरआई नहीं, जांच के लिए घायल हो रहे रेफर
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जौनसार बावर और विकासनगर में नहीं है सुविधा
गंभीर रूप से घायल मरीजों के उपचार में समय होता है महत्वपूर्ण
जौनसार बावर और विकासनगर के किसी भी सरकारी अस्पताल में सीटी स्कैन और एमआरआई की सुविधा नहीं है। अस्पताल में दुर्घटना के बाद उपचार के लिए लाए जाने वाले घायलों को सीटी स्कैन और एमआरआई न होने के चलते देहरादून रेफर कर दिया जाता है। घायल को देहरादून में उपचार के लिए पहुंचाने में एक से डेढ़ घंटे का और समय लगता है, जिससे कई बार मरीज के जीवन पर ही संकट आ जाता है।
जौनसार क्षेत्र और विकासनगर में बड़े सरकारी अस्पताल तो बनाए गए, पर चिकित्सकीय संसाधनों के अभाव में ये अस्पताल रेफरल सेंटर बनकर रह गए हैं। सीएचसी साहिया, कालसी, उप जिला अस्पताल विकासनगर कहीं भी सीटी स्कैन और एमआरआई की जांच सुविधा नहीं है।
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दुर्घटना में घायल होने वाले अधिकांश मरीजों के सिर और शरीर की अंदरूनी चोटों का पता लगाने के लिए सीटी स्कैन और एमआरआई जांच करवाई जाती है। जांच रिपोर्ट में समस्या का पता चलने पर तत्काल उपचार शुरू किया जाता है। सीएचसी साहिया और कालसी तो दूर की बात है पूरे जौनसार क्षेत्र की लाइफलाइन उप जिला अस्पताल में भी सीटी स्कैन और एमआरआई जांच की सुविधा नहीं है।
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जौनसार क्षेत्र में आए दिन सड़क दुर्घटनाएं होती रहती है। कई लोग गिरने से भी घायल होते है। उपचार की आस में मरीज उप जिला अस्पताल आते हैं, यहां पता चलता है सीटी स्कैन और एमआरआई जांच के लिए देहरादून जाना पड़ेगा।
नए अस्पताल से सुविधाओं की आस
डाकपत्थर में नया अस्पताल भवन तैयार किया जा रहा है। विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने अस्पताल के शिलान्यास के दौरान हृदय रोग विशेषज्ञ, न्यूरोलॉजिस्ट और ट्राॅमा सेंटर जैसी सुविधाएं उपलब्ध करवाने का दावा किया था। अगर ऐसा होता है तो अस्पताल में सीटी स्कैन और एमआरआई का रास्ता भी साफ हो जाएगा।
एक महीने में नौ मरीज हुए रेफर
उप जिला अस्पताल में दुर्घटना के बाद 11 मरीजों को अस्पताल में उपचार के लिए लाया गया। इनमें से नौ मरीजों को सीटी स्कैन और एमआरआई जांच की जरूरत थी, लेकिन सुविधा न होने के चलते चिकित्सकों ने मरीजों को दून अस्पताल रेफर कर दिया। अस्पताल के पास सर्जन और हड्डी रोग विशेषज्ञ दोनों ही हैं। जांच की सुविधा होती तो मरीजों का तत्काल उपचार शुरू हो पाता।
वर्जन
विधायक की ओर से नए अस्पताल भवन में ट्राॅमा सेंटर बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। अगर ट्रॉमा सेंटर बनता है तो अस्पताल में सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी सुविधाओं के प्रस्ताव भी शासन को भेजे जाएंगे।
- डॉ. विजय सिंह, चिकित्सा अध्यीक्षक, उप जिला अस्पताल