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शिवालिक की तलहटी में बसे तीन गांवो पर प्राकृतिक आपदा का मंडरा रहा खतरा

Fri, 15 Jul 2022 11:00 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 15 Jul 2022 11:00 PM IST
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There is a danger of natural calamity on the three villages situated in the foothills of Shivalik.
शिवालिक की पहाड़ियों के ढ़लान पर व यमुना और आसन नदी के किनारे पर बसे ग्राम कुंजाग्रांट, कुंजा व मटकमाजरी पर बरसात का मौसम भारी गुजरता है। शिवालिक की पहाड़ियों से निकलने वाले कई बड़े व छोटे बरसाती नाले तीनों गांवों के बीच से होकर यमुना या आसन नदी में गिरते हैं। बरसात से पहले नालों की सफाई से लेकर उनके निर्माण जैसे आवश्यक कार्य नहीं कराए जाने से ग्रामीण सहमे रहते हैं।
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ग्राम पंचायत कुंजाग्रांट, कुंजा व इसके मजरे मटकमाजरी के निवासियों को बरसात का मौसम डराने लगता है। गांव से होकर निकलने वाले बरसाती नालों में आने वाला बेतहाशा पानी ग्रामीणों के लिए मुसीबत बनता है। नालों से ओवरफ्लो होकर शिवालिक की पहाड़ियों व तिमली रेंज के जंगल से बहकर आने वाला पानी ग्रामीणों के खेतों, घरों व गांव के रास्तों को अपना निशाना बनाता है। ग्राम कुंजाग्रांट के पूर्व प्रधान मोहम्मद आरिफ, मोहम्मद गालिब, ग्राम पंचायत कुल्हाल के प्रधान मोहम्मद सलीम का कहना है कि सन 2010 से लेकर अभी तक उनके माध्यम से हर साल प्रदेश के मुख्यमंत्री, वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, सिंचाई विभाग से नालों का निर्माण कराए जाने के संबंध में पत्राचार किया जा रहा है। अभी तक एक भी नाले का निर्माण नहीं कराया गया है। उनका कहना है कि यदि प्रदेश सरकार व सरकारी विभागों की लापरवाही की स्थिति यही रही तो एक दिन तीनों गांव यमुना या आसन नदी में समा जाएंगे। संवाद
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बरसाती नालो के कारण दो बार आ चुकी आपदा
सन 2010 व 2014 के बरसात के मौसम को ग्रामीण कभी भुुला नहीं सकते। 2010 में बरसाती नाले के कारण आई आपदा ने मटक माजरी व कुंजा में व्यापक स्तर पर तबाही मचाई थी। नाले में आई बाढ़ ने गांव के चालीस घरों को अपने साथ बहा लिया था। इसके अलावा गांव के राजकीय प्राथमिक विद्यालय व गांव के किनारे पर बहने वाली जलविद्युत परियोजना की शक्ति नहर को भी बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया था। इसके चार साल बाद 2014 में एक बार फिर से नाले ने रौद्र रूप धारण करते हुए ग्रामीणों की फसलों व उनके घरों को नुकसान पहुंचाया था।
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नदी नालो से घिरे हैं तीनों गांव
बरसाती नालो व नदी, नहर से घिरे ग्राम कुंजाग्रांट की आबादी लगभग छह हजार, कुंजा की आबादी लगभग छह हजार व मटक माजरी की आबादी लगभग चार हजार है। गांवों के एक किनारे पर शक्ति नहर व आसन नदी स्थित है तो मटक माजरी का एक पूरा आबादी क्षेत्र यमुना नदी के किनारे पर बसा है। शिवालिक की पहाड़ियों व तिमली वन रेंज के जंगल से आने वाला बरसात का पानी ढ़ालनुमा जमीन पर बसे इन गांवों से होकर गुजरने वाले बरसाती नालो से बेहद तेज गति से गुजरता है। ऐसे में जब भी पानी नालो से बाहर निकलकर बहा है, तभी क्षेत्र में बड़ी तबाही हुई है।
विकासनगर क्षेत्र के संबंध में मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है। इस संबंध में विकासनगर के अधिकारियों से बेहतर जानकारी मिल सकती है। - आरके तिवारी, एसई, सिंचाई विभाग

ग्राम कुंजा, मटक माजरी व कुंजाग्रांट के सभी नालों के निर्माण के लिए कई साल पहले योजनाएं बनाकर शासन को भेजी जा चुकी हैं। बजट नहीं होने के कारण अभी तक इन योजनाओं की स्वीकृति नहीं हो पाई है। इसके अलावा ग्राम कुंजाग्रांट में आसन नदी में विभाग ने कुछ कार्य कराया भी है। योजनाओं की स्वीकृति मिलने के बाद नालों का निर्माण शुरू करा दिया जाएगा। - आरएस गुंसाई, अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग।
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