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Dehradun News: चार पीढ़ियों का इंतजार खत्म, सधाण परिवार के घर विराजे भगवान परशुराम और माता रेणुका
Sun, 01 Nov 2026 06:42 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
Updated Sun, 01 Nov 2026 06:42 PM IST
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- एक रात के प्रवास पर कनबुआ गांव पहुंचीं देवताओं की पालकियां, उमड़े श्रद्धालु
- माशु गांव के प्राचीन मंदिर से विधि-विधान के साथ रवाना हुई थीं दोनों पालकियां
संवाद न्यूज एजेंसी
साहिया। चार पीढ़ियों के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार भगवान परशुराम महाराज और माता रेणुका की पालकियां एक रात के प्रवास पर कनबुआ गांव पहुंचीं। देवताओं के आगमन से गांव के सधाण परिवार के साथ-साथ पूरे क्षेत्र में भारी उत्साह और उत्सव का माहौल देखने को मिला। आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु देव दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे।
हिमाचल प्रदेश के माशु गांव में भगवान परशुराम और माता रेणुका का प्राचीन मंदिर है। कनबुआ निवासी अतर सिंह पंवार ने बताया कि उनके दादा धर्म सिंह और तोला सिंह ने परिवार व क्षेत्र की खुशहाली के लिए मंदिर में विराजमान दोनों देवताओं को एक रात के प्रवास के लिए अपने घर आमंत्रित करने की प्रार्थना की थी। इस मनोकामना के पूरी होने का इंतजार चार पीढ़ियों तक चला, जो अब जाकर देवताओं की कृपा से पूर्ण हुई है।
उन्होंने बताया कि शनिवार को पालकियों को स्नान के लिए ले जाया गया था। रविवार सुबह चार बजे स्नान के बाद पालकियां दोबारा मंदिर लाई गईं और फिर दोपहर एक बजे कनबुआ के लिए प्रस्थान किया। तुनिया, कालसी, हईया, अलसी और सकनी होते हुए पालकियां जब गांव पहुंचीं, तो श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर भव्य स्वागत किया। ढोल-नगाड़ों की गूंज और विधि-विधान के साथ शाम करीब चार बजे दोनों पालकियों को सधाण परिवार के पैतृक मकान में विराजमान कराया गया। एक रात के प्रवास के बाद सोमवार दोपहर करीब एक बजे पालकियां वापस माशु गांव के लिए प्रस्थान करेंगी। इस अवसर पर वजीर अजब सिंह चौहान, भंडारी गुलाब सिंह चौहान, पुजारी वीरेंद्र शर्मा, बबलू शर्मा, शूरवीर शर्मा, खुशी राम, तोता राम शर्मा, देव माली रणसिंह चौहान, श्याम सिंह चौहान और कुंवर सिंह चौहान आदि मौजूद रहे।
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- माशु गांव के प्राचीन मंदिर से विधि-विधान के साथ रवाना हुई थीं दोनों पालकियां
संवाद न्यूज एजेंसी
साहिया। चार पीढ़ियों के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार भगवान परशुराम महाराज और माता रेणुका की पालकियां एक रात के प्रवास पर कनबुआ गांव पहुंचीं। देवताओं के आगमन से गांव के सधाण परिवार के साथ-साथ पूरे क्षेत्र में भारी उत्साह और उत्सव का माहौल देखने को मिला। आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु देव दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे।
हिमाचल प्रदेश के माशु गांव में भगवान परशुराम और माता रेणुका का प्राचीन मंदिर है। कनबुआ निवासी अतर सिंह पंवार ने बताया कि उनके दादा धर्म सिंह और तोला सिंह ने परिवार व क्षेत्र की खुशहाली के लिए मंदिर में विराजमान दोनों देवताओं को एक रात के प्रवास के लिए अपने घर आमंत्रित करने की प्रार्थना की थी। इस मनोकामना के पूरी होने का इंतजार चार पीढ़ियों तक चला, जो अब जाकर देवताओं की कृपा से पूर्ण हुई है।
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उन्होंने बताया कि शनिवार को पालकियों को स्नान के लिए ले जाया गया था। रविवार सुबह चार बजे स्नान के बाद पालकियां दोबारा मंदिर लाई गईं और फिर दोपहर एक बजे कनबुआ के लिए प्रस्थान किया। तुनिया, कालसी, हईया, अलसी और सकनी होते हुए पालकियां जब गांव पहुंचीं, तो श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर भव्य स्वागत किया। ढोल-नगाड़ों की गूंज और विधि-विधान के साथ शाम करीब चार बजे दोनों पालकियों को सधाण परिवार के पैतृक मकान में विराजमान कराया गया। एक रात के प्रवास के बाद सोमवार दोपहर करीब एक बजे पालकियां वापस माशु गांव के लिए प्रस्थान करेंगी। इस अवसर पर वजीर अजब सिंह चौहान, भंडारी गुलाब सिंह चौहान, पुजारी वीरेंद्र शर्मा, बबलू शर्मा, शूरवीर शर्मा, खुशी राम, तोता राम शर्मा, देव माली रणसिंह चौहान, श्याम सिंह चौहान और कुंवर सिंह चौहान आदि मौजूद रहे।
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