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Dehradun News: भोपालपानी ने स्थापित की दूध मंडी की नई पहचान
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I- गांव में बने होमस्टे भी पयर्टकों को खूब लुभा रहे
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I- जैविक विधि से उगाई जा रहीं सब्जियां व गेहूं की फसलI
प्राकृति सौंदर्य से समृद्ध उत्तराखंड के गांव पर्यटन के लिहाज से संवरने लगे हैं। वहीं, गांव पहाड़ी जीवन के साथ ही ग्रामीण रोजगार की ओर भी तेजी से पांव पसार रहे हैं। जैविक खेती व पशुपालन से होने वाली आमदनी से गांव समृद्धिशाली होते जा रहे हैं। थानो रोड पर बसे गांव भोपालपानी ने पशुपालन के क्षेत्र में नए कीर्तिमान बनाए हैं। ग्रामीणों की मेहनत और सफलता यह है कि गांव को अब दूध की मंडी के तौर पर पहचाना जाने लगा है।
थानो रोड पर जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर पहाड़ियों की तलहटियों में बसा भोपालपानी गांव देहरादून की दूध मंडी के नाम से अपनी पहचान बना रहा है। गांव में ऊंचा-नीचा मैदानी क्षेत्र यहां कि किसानों के लिए खासा वरदान साबित हो रहा है। करीब दो हजार लोगों की आबादी से बसा गांव भोपालपानी पशुपालन के साथ ही जैविक विधि से फसलों के उत्पादन के लिए भी जाना जाता है। पुरानी से युवा पीढ़ी तक एक बड़ा वर्ग पशुपालन के जरिये ही आय हासिल करता आ रहा है। गांव के 80 से 120 परिवार गाय व भैंस का बड़े स्तर पर पालन कर रहे हैं।
दूध बेचने के लिए इन लोगों के पास प्रर्याप्त बाजार भी है। गांवों में बने होमस्टे, रेस्टोरेंट, कॉलोनियों के अलावा राजधानी तक में ये पशुपालक हररोज दूध की सप्लाई कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर गांव में बने होमस्टे में जैविक विधि से उगाए गए मोटे अनाज और सब्जी के साथ ही गेहूं, धान व मंडवा की रोटी पयर्टकों को खूब लुभा रही है।
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Iयातायात व आवारा पशु बड़ी समस्याI
थानो रोड पर होने के बावजूद गांव भोपालपानी से राजधानी देहरादून के लिए कोई यातायात का साधन नहीं है। जिसके कारण ग्रामीणों को जिला मुख्यालय पहुंंचने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है। इसके अलावा गांव से निकलने वाले रोड पर अधिक ट्रैफिक होने से आए दिनों आवारा पशु दुर्घटना का शिकार बन रहे हैं। आवारा पशुओं के लिए सरकार की ओर से बेहतर इंतजाम किए जाने की मांग ग्रामीणों की ओर से की जाती रही है लेकिन कोई बंदोबस्त नहीं हो सका है।
Iपशुपालन का कारोबार ग्रामीण क्षेत्रों के लिए रोजगार का बड़ा साधन है। ग्रामीण लोगों को इसकी पहले से ही बेहतर समझ होने से इस कारोबार में अच्छा खासा मुनाफा हासिल हो रहा है। हालांकि, युवा पीढ़ी इसमें कम रुचि ले रही है।
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I- जितेंद्र सोलंकी, ग्रामीण, भोपालपानीI
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Iपशुपालन के साथ ही होमस्टे का कारोबार ग्रामीणों के लिए आमदनी का बेहतर जरिया बना हुआ है। सरकार की ओर से विशेष प्रयास हो तो गांव दूध उत्पादन में एक हब के रूप में विकसित हो सकता है। हालांकि, लोगों ने अपनी क्षमता के अनुसार पशुपालन को विकसित किया है। - अभिषेक सिंह, ग्रामीण, भोपालपानीI
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I- जैविक विधि से उगाई जा रहीं सब्जियां व गेहूं की फसलI
प्राकृति सौंदर्य से समृद्ध उत्तराखंड के गांव पर्यटन के लिहाज से संवरने लगे हैं। वहीं, गांव पहाड़ी जीवन के साथ ही ग्रामीण रोजगार की ओर भी तेजी से पांव पसार रहे हैं। जैविक खेती व पशुपालन से होने वाली आमदनी से गांव समृद्धिशाली होते जा रहे हैं। थानो रोड पर बसे गांव भोपालपानी ने पशुपालन के क्षेत्र में नए कीर्तिमान बनाए हैं। ग्रामीणों की मेहनत और सफलता यह है कि गांव को अब दूध की मंडी के तौर पर पहचाना जाने लगा है।
थानो रोड पर जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर पहाड़ियों की तलहटियों में बसा भोपालपानी गांव देहरादून की दूध मंडी के नाम से अपनी पहचान बना रहा है। गांव में ऊंचा-नीचा मैदानी क्षेत्र यहां कि किसानों के लिए खासा वरदान साबित हो रहा है। करीब दो हजार लोगों की आबादी से बसा गांव भोपालपानी पशुपालन के साथ ही जैविक विधि से फसलों के उत्पादन के लिए भी जाना जाता है। पुरानी से युवा पीढ़ी तक एक बड़ा वर्ग पशुपालन के जरिये ही आय हासिल करता आ रहा है। गांव के 80 से 120 परिवार गाय व भैंस का बड़े स्तर पर पालन कर रहे हैं।
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दूध बेचने के लिए इन लोगों के पास प्रर्याप्त बाजार भी है। गांवों में बने होमस्टे, रेस्टोरेंट, कॉलोनियों के अलावा राजधानी तक में ये पशुपालक हररोज दूध की सप्लाई कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर गांव में बने होमस्टे में जैविक विधि से उगाए गए मोटे अनाज और सब्जी के साथ ही गेहूं, धान व मंडवा की रोटी पयर्टकों को खूब लुभा रही है।
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Iयातायात व आवारा पशु बड़ी समस्याI
थानो रोड पर होने के बावजूद गांव भोपालपानी से राजधानी देहरादून के लिए कोई यातायात का साधन नहीं है। जिसके कारण ग्रामीणों को जिला मुख्यालय पहुंंचने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है। इसके अलावा गांव से निकलने वाले रोड पर अधिक ट्रैफिक होने से आए दिनों आवारा पशु दुर्घटना का शिकार बन रहे हैं। आवारा पशुओं के लिए सरकार की ओर से बेहतर इंतजाम किए जाने की मांग ग्रामीणों की ओर से की जाती रही है लेकिन कोई बंदोबस्त नहीं हो सका है।
Iपशुपालन का कारोबार ग्रामीण क्षेत्रों के लिए रोजगार का बड़ा साधन है। ग्रामीण लोगों को इसकी पहले से ही बेहतर समझ होने से इस कारोबार में अच्छा खासा मुनाफा हासिल हो रहा है। हालांकि, युवा पीढ़ी इसमें कम रुचि ले रही है।
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I- जितेंद्र सोलंकी, ग्रामीण, भोपालपानीI
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Iपशुपालन के साथ ही होमस्टे का कारोबार ग्रामीणों के लिए आमदनी का बेहतर जरिया बना हुआ है। सरकार की ओर से विशेष प्रयास हो तो गांव दूध उत्पादन में एक हब के रूप में विकसित हो सकता है। हालांकि, लोगों ने अपनी क्षमता के अनुसार पशुपालन को विकसित किया है। - अभिषेक सिंह, ग्रामीण, भोपालपानीI