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Dehradun News: आसन झील में पक्षियों की संख्या 3500 के पार, अब बार हेडेड गीज का इंतजार
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I24 विदेशी प्रजाति के परिंदे हर साल प्रवास पर पहुंचते हैंI
आसन कंजरवेशन रिजर्व (आसन झील) में विदेशी पक्षियों के पहुंचने का सिलसिला जारी है। अब तक सुर्खाव समेत 12 से अधिक प्रजाति के करीब 3500 विदेशी पक्षी प्रवास पर पहुंच चुके हैं। अब भी पक्षी प्रेमियों को प्लाश फिश ईगल के साथ ही बार हेडेड गीज पक्षी का इंतजार है।
इन दिनों झील में विदेशी परिंदों की करलव पक्षी प्रेमियों के साथ ही सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। इनका दीदार करने के लिए बड़ी संख्या में सैलानी पहुंच रहे हैं। आसन संरक्षण रिजर्व कई दुर्लभ और लुप्त प्राय प्रजातियों का घर है। यह प्रवासी पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण शीतकालीन आश्रम स्थल है। करीब 444.4 हेक्टेयर में फैला यह क्षेत्र उत्तराखंड का पहला रामसर साइट भी है। आसन और यमुना नदियों के संगम पर स्थित इस जैव विविधतापूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र को वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की आधार 36 ए के तहत 2005 में एक संरक्षण रिजर्व घोषित किया गया था। अक्टूबर माह में ठंड की दस्तक के साथ ही यहां मध्य एशिया समेत चीन, रूस आदि इलाकों से पक्षी प्रवास पर पहुंचते हैं। इस बार सात अक्तूबर को विदेशी पक्षियों का पहला झुंड आसन झील पहुंचा। आसन वेटलैंड सुर्खाब पक्षी (रूडी शेल्डक) का पसंदीदा स्थल है।
Iइन विदेशी मेहमानों ने दी दस्तकI
अब तक आसन झील में सुर्खाब समेत कॉमन पोचार्ड, रेड क्रिस्टेड पोचार्ड, गेडवॉल, मलाड, फैरी ज्यूनस, हीरोशियन विजन, नार्दन सावलर, कामन कूट, टफटैड, नार्दन पिंटेल, ग्रैलैग गीज समेत करीब 11 विदेशी प्रजाति के पक्षी पहुंच चुके हैं। यहां हर साल करीब 24 विदेशी प्रजाति के परिंदे प्रवास पर पहुंचते हैं।
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Iझील में पक्षियों को आने का सिलसिला जारी है। पक्षियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। सुरक्षा के लिए लगातार गश्त की जा रही है। बड़ी संख्या में लोग पक्षियों का दीदार करने पहुंच रहे हैं। IIप्रदीप सक्सेना, वन दारोगा और बर्ड वॉचिंग विशेषज्ञI
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आसन कंजरवेशन रिजर्व (आसन झील) में विदेशी पक्षियों के पहुंचने का सिलसिला जारी है। अब तक सुर्खाव समेत 12 से अधिक प्रजाति के करीब 3500 विदेशी पक्षी प्रवास पर पहुंच चुके हैं। अब भी पक्षी प्रेमियों को प्लाश फिश ईगल के साथ ही बार हेडेड गीज पक्षी का इंतजार है।
इन दिनों झील में विदेशी परिंदों की करलव पक्षी प्रेमियों के साथ ही सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। इनका दीदार करने के लिए बड़ी संख्या में सैलानी पहुंच रहे हैं। आसन संरक्षण रिजर्व कई दुर्लभ और लुप्त प्राय प्रजातियों का घर है। यह प्रवासी पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण शीतकालीन आश्रम स्थल है। करीब 444.4 हेक्टेयर में फैला यह क्षेत्र उत्तराखंड का पहला रामसर साइट भी है। आसन और यमुना नदियों के संगम पर स्थित इस जैव विविधतापूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र को वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की आधार 36 ए के तहत 2005 में एक संरक्षण रिजर्व घोषित किया गया था। अक्टूबर माह में ठंड की दस्तक के साथ ही यहां मध्य एशिया समेत चीन, रूस आदि इलाकों से पक्षी प्रवास पर पहुंचते हैं। इस बार सात अक्तूबर को विदेशी पक्षियों का पहला झुंड आसन झील पहुंचा। आसन वेटलैंड सुर्खाब पक्षी (रूडी शेल्डक) का पसंदीदा स्थल है।
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Iइन विदेशी मेहमानों ने दी दस्तकI
अब तक आसन झील में सुर्खाब समेत कॉमन पोचार्ड, रेड क्रिस्टेड पोचार्ड, गेडवॉल, मलाड, फैरी ज्यूनस, हीरोशियन विजन, नार्दन सावलर, कामन कूट, टफटैड, नार्दन पिंटेल, ग्रैलैग गीज समेत करीब 11 विदेशी प्रजाति के पक्षी पहुंच चुके हैं। यहां हर साल करीब 24 विदेशी प्रजाति के परिंदे प्रवास पर पहुंचते हैं।
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Iझील में पक्षियों को आने का सिलसिला जारी है। पक्षियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। सुरक्षा के लिए लगातार गश्त की जा रही है। बड़ी संख्या में लोग पक्षियों का दीदार करने पहुंच रहे हैं। IIप्रदीप सक्सेना, वन दारोगा और बर्ड वॉचिंग विशेषज्ञI