{"_id":"680ba9a1dbe784f48b04383d","slug":"the-message-of-beti-bachao-beti-padhao-was-given-through-poetry-recitation-vikas-nagar-news-c-39-1-vkn1003-120779-2025-04-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Dehradun News: काव्य पाठ के माध्यम से दिया बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का संदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Dehradun News: काव्य पाठ के माध्यम से दिया बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का संदेश
विज्ञापन
गुरु राम राय इंटर कॉलेज में आयोजित की गई काव्य गोष्ठी
संवाद न्यूज एजेंसी
विकासनगर। गुरु राम राय इंटर कॉलेज बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में कवियों ने काव्य पाठ के माध्यम से बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का संदेश दिया। युवा कवि विभा ने छुई मुई नहीं है बेटी राष्ट्र की... कविता पढ़ी। नीलम शर्मा ने बिन बेटी के सूनी सूनी बगिया हो जाएगी... गीत गाया।
भारती अनंता ने आधी आजादी बेटी की और सारी बेटों की... कविता से पुरुष प्रधान सामाजिक व्यवस्था पर तंज कसे। अंजू राजपूतानी ने बेटी के हत्यारों को मिलकर सबक सिखाना है, सजा मौत की क्या होती है कहां इन्होंने जाना है... मार्मिक गीत के माध्यम से समाज में फैली कुरीति को मिटाने का संदेश दिया। निधि ने नारी स्वयं ही है एक प्रिय घोर व्यथा, बेटी को अबला कहना स्वीकार्य नहीं ओज गीत पढ़ा। डॉ. मदन पाल बिरला ने जिसके बिना यह सृष्टि असंभव, कहते उसको नारी हैं, जो कभी मां कभी पत्नी या बेटी बहन के जैसी प्यारी है...गीत से समाज में नारी के उच्च स्थान को इंगित किया। इसके अलावा पुष्पेंद्र त्यागी, राजन शर्मा, नैना कैंसवाल, आलोक बिजल्वाण, संजय सैनी, डॉ. कामेश्वर प्रसाद डिमरी, डॉ. रविंद्र सैनी, आलोक बिजल्वाण आदि ने काव्य पाठ किया।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
विकासनगर। गुरु राम राय इंटर कॉलेज बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में कवियों ने काव्य पाठ के माध्यम से बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का संदेश दिया। युवा कवि विभा ने छुई मुई नहीं है बेटी राष्ट्र की... कविता पढ़ी। नीलम शर्मा ने बिन बेटी के सूनी सूनी बगिया हो जाएगी... गीत गाया।
भारती अनंता ने आधी आजादी बेटी की और सारी बेटों की... कविता से पुरुष प्रधान सामाजिक व्यवस्था पर तंज कसे। अंजू राजपूतानी ने बेटी के हत्यारों को मिलकर सबक सिखाना है, सजा मौत की क्या होती है कहां इन्होंने जाना है... मार्मिक गीत के माध्यम से समाज में फैली कुरीति को मिटाने का संदेश दिया। निधि ने नारी स्वयं ही है एक प्रिय घोर व्यथा, बेटी को अबला कहना स्वीकार्य नहीं ओज गीत पढ़ा। डॉ. मदन पाल बिरला ने जिसके बिना यह सृष्टि असंभव, कहते उसको नारी हैं, जो कभी मां कभी पत्नी या बेटी बहन के जैसी प्यारी है...गीत से समाज में नारी के उच्च स्थान को इंगित किया। इसके अलावा पुष्पेंद्र त्यागी, राजन शर्मा, नैना कैंसवाल, आलोक बिजल्वाण, संजय सैनी, डॉ. कामेश्वर प्रसाद डिमरी, डॉ. रविंद्र सैनी, आलोक बिजल्वाण आदि ने काव्य पाठ किया।
विज्ञापन