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हर पांचवें बच्चे को कुछ न कुछ मानसिक समस्या : डाॅ. मर्तोलिया
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Iवुडस्टाॅक स्कूल में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वैल-बीइंग कॉन्फ्रेंस संपन्न
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I17 राज्यों के 77 स्कूलों समेत नेपाल के 232 छात्र शामिलI
वुडस्टाॅक स्कूल में पहली दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वैल-बीइंग कॉन्फ्रेंस संपन्न हो गई। इसमें देश के 17 राज्यों के 77 स्कूलों समेत नेपाल के 232 छात्र और प्रतिनिधि शामिल हुए। कॉन्फ्रेंस में स्कूलों में छात्रों के हित, मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक लचीलेपन को बढ़ाने वाली अभिनव नीतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण के असिस्टेंट डायरेक्टर डाॅ. कुलदीप मर्तोलिया ने कहा कि एनएचएम के माध्यम से स्टेट मेंटल हेल्थ प्रोग्राम चलाए जाते हैं।मानसिक रोगियों की काउंसलिंग की जाती है। कहा हर पांचवें बच्चे को कुछ न कुछ समस्या होती है। समय पर ध्यान नहीं दिया गया तो आगे चलकर गंभीर परिणाम हो सकते हैं। नेपाल से आए प्रतिनिधि सुमन पोडले ने कहा कि विशेषज्ञों से बहुत कुछ सीखने को मिला। डिजिटल, मोबाइल आदि के प्रयोग से होने वाले नुकसान के बारे में बताया गया।
काउंसलर दृष्टि भसीन ने कहा बच्चों के मानसिक एवं भावनात्मक लगाव में संतुलन बनाना जरूरी है। इस दौरान कार्यक्रम संयोजक बीनू थॉमस, प्रधानाचार्य डाॅ. क्रेक कुक, आस्ट्रेलिया से आए मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डेविड बोट, आईपीएस मनोज अब्राहम, डॉ. पुतुलेमला, सुनीता शर्मा, रेनू प्रियंका, राहुल आदि मौजूद रहे।
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I17 राज्यों के 77 स्कूलों समेत नेपाल के 232 छात्र शामिलI
वुडस्टाॅक स्कूल में पहली दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वैल-बीइंग कॉन्फ्रेंस संपन्न हो गई। इसमें देश के 17 राज्यों के 77 स्कूलों समेत नेपाल के 232 छात्र और प्रतिनिधि शामिल हुए। कॉन्फ्रेंस में स्कूलों में छात्रों के हित, मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक लचीलेपन को बढ़ाने वाली अभिनव नीतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण के असिस्टेंट डायरेक्टर डाॅ. कुलदीप मर्तोलिया ने कहा कि एनएचएम के माध्यम से स्टेट मेंटल हेल्थ प्रोग्राम चलाए जाते हैं।मानसिक रोगियों की काउंसलिंग की जाती है। कहा हर पांचवें बच्चे को कुछ न कुछ समस्या होती है। समय पर ध्यान नहीं दिया गया तो आगे चलकर गंभीर परिणाम हो सकते हैं। नेपाल से आए प्रतिनिधि सुमन पोडले ने कहा कि विशेषज्ञों से बहुत कुछ सीखने को मिला। डिजिटल, मोबाइल आदि के प्रयोग से होने वाले नुकसान के बारे में बताया गया।
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काउंसलर दृष्टि भसीन ने कहा बच्चों के मानसिक एवं भावनात्मक लगाव में संतुलन बनाना जरूरी है। इस दौरान कार्यक्रम संयोजक बीनू थॉमस, प्रधानाचार्य डाॅ. क्रेक कुक, आस्ट्रेलिया से आए मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डेविड बोट, आईपीएस मनोज अब्राहम, डॉ. पुतुलेमला, सुनीता शर्मा, रेनू प्रियंका, राहुल आदि मौजूद रहे।
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