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Dehradun News: बीज की कमी के कारण चिंतित नजर आ रहे अदरक उत्पादक किसान
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पछवादून से जौनसार बावर तक 1200 हेक्टेयर में होती है खेती
अदरक की खेती से जुड़े किसान इस बार फसल को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं। सरकारी स्तर से बीज उपलब्ध नहीं कराए जाने के चलते किसानों ने बीज का इंतजाम करके फसल की बुवाई तो कर ली लेकिन, उसकी गुणवत्ता व उत्पादकता को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है।
पछवादून का क्षेत्र समुद्र तल से लगभग तीन हजार और जौनसार बावर के इलाके चार से लेकर आठ हजार फीट तक की ऊंचाई पर हैं। अदरक के उत्पादन के लिहाज से पूरा क्षेत्र बेहद महत्वपूर्ण है। यही कारण भी है कि पछवादून से लेकर जौनसार बावर तक अदरक की खेती व्यापक स्तर पर की जाती है। इस बार बीज नहीं मिल पाने से किसानों को निराशा हाथ लगी है। जिससे सभी किसान अदरक की बुवाई नहीं कर पाए हैं। जिसका असर आने वाले समय में अदरक के दाम पर पड़ना तय माना जा रहा है।
व्यापक स्तर पर होती है खेती
पछवादून से लेकर जौनसार बावर तक लगभग 1200 हेक्टेयर में अदरक की खेती की जाती है। खेती के लिए एक हेक्टेयर में लगभग 25 क्विंटल बीज की आवश्यकता होती है और उत्पादन 110 से 125 क्विंटल प्रति हेक्टेयर आता है। यदि किसी खेत में यह मात्रा 150 क्विंटल पहुंचती है तो इसे बंपर फसल कहा जाता है।
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बीज और प्रजाति
क्षेत्र में आमतौर पर हिमगिरी और गिरी गंगा नामक प्रजातियों का अदरक बोया जाता है। बीज के लिए सरकारी स्तर पर टेंडर की जाती है लेकिन इस बार बीज उपलब्ध नहीं होने से किसानों ने अपने स्रोतों से बीज हासिल करके बुवाई की। किसान बलबीर सिंह, सुरेंद्र सिंह, गुलफाम का कहना है कि बुवाई तो अपने स्तर से की गई है लेकिन फसल की गुणवत्ता और मात्रा कैसी रहेगी यह आने वाला समय ही बताएगा।
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अदरक की खेती से जुड़े किसान इस बार फसल को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं। सरकारी स्तर से बीज उपलब्ध नहीं कराए जाने के चलते किसानों ने बीज का इंतजाम करके फसल की बुवाई तो कर ली लेकिन, उसकी गुणवत्ता व उत्पादकता को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है।
पछवादून का क्षेत्र समुद्र तल से लगभग तीन हजार और जौनसार बावर के इलाके चार से लेकर आठ हजार फीट तक की ऊंचाई पर हैं। अदरक के उत्पादन के लिहाज से पूरा क्षेत्र बेहद महत्वपूर्ण है। यही कारण भी है कि पछवादून से लेकर जौनसार बावर तक अदरक की खेती व्यापक स्तर पर की जाती है। इस बार बीज नहीं मिल पाने से किसानों को निराशा हाथ लगी है। जिससे सभी किसान अदरक की बुवाई नहीं कर पाए हैं। जिसका असर आने वाले समय में अदरक के दाम पर पड़ना तय माना जा रहा है।
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व्यापक स्तर पर होती है खेती
पछवादून से लेकर जौनसार बावर तक लगभग 1200 हेक्टेयर में अदरक की खेती की जाती है। खेती के लिए एक हेक्टेयर में लगभग 25 क्विंटल बीज की आवश्यकता होती है और उत्पादन 110 से 125 क्विंटल प्रति हेक्टेयर आता है। यदि किसी खेत में यह मात्रा 150 क्विंटल पहुंचती है तो इसे बंपर फसल कहा जाता है।
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बीज और प्रजाति
क्षेत्र में आमतौर पर हिमगिरी और गिरी गंगा नामक प्रजातियों का अदरक बोया जाता है। बीज के लिए सरकारी स्तर पर टेंडर की जाती है लेकिन इस बार बीज उपलब्ध नहीं होने से किसानों ने अपने स्रोतों से बीज हासिल करके बुवाई की। किसान बलबीर सिंह, सुरेंद्र सिंह, गुलफाम का कहना है कि बुवाई तो अपने स्तर से की गई है लेकिन फसल की गुणवत्ता और मात्रा कैसी रहेगी यह आने वाला समय ही बताएगा।