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बौद्ध सर्किट से जुड़ा तो अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के नक्शे पर आ जाएग कालसी--

Wed, 24 Aug 2022 01:00 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Wed, 24 Aug 2022 01:00 AM IST
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The exercise of connecting the inscription to the Buddhist circuit did not work, the exercise of connecting the inscription to the Buddhist circuit did not work.
उत्तराखंड को पर्यटन प्रदेश बनाने के दावे धरातल पर कितने सार्थक हो रहे हैं, इसका प्रत्यक्ष उदाहरण कालसी स्थित सम्राट अशोक का शिलालेख है। शिलालेख को बीते कई वर्षों से पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बौद्ध सर्किट से जोड़ने की बात की जा रही है, लेकिन अभी तक इस संबंध में कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई है।
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महान सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म के सिद्धांतों के प्रचार प्रसार के लिए विश्व के प्रमुख स्थानों पर शिलालेख स्थापित करवाए थे। इनमें से एक शिलालेख देहरादून जिले के कालसी में भी स्थित है। पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा संरक्षित इस ऐतिहासिक शिलालेख को देखने तथा इस पर लिखे गए बौद्ध धर्म संबंधी उपदेशों को पढ़ने व समझने के लिए देश-विदेश से लोग आते रहते हैं।
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वर्ष 2014 में केंद्र सरकार ने पुरातात्विक और ऐतिहासिक महत्व के बौद्ध धर्म स्थलों को चिन्हित करके उनका एक सर्किट बनाने की कवायद शुरू करने की बात कही थी। केंद्र सरकार की इस घोषणा से उत्तर भारत के एकमात्र कालसी स्थित अशोक शिलालेख को भी जोड़े जाने की आस जगी थी। उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व सदस्य संजय जैन ने केंद्र तथा राज्य सरकार से बाकायदा पत्राचार कर अशोक शिलालेख कालसी को बौद्ध सर्किट से जोड़ने के लिए आग्रह किया था। कई वर्ष बीत जाने के बाद भी इस संबंध में केंद्र तथा राज्य सरकार की ओर से कोई पहल दिखाई नहीं पड़ता है, जिससे क्षेत्रवासियों में भी मायूसी है। पूर्व प्रधान रेखा देवी, कपिल चौहान आदि का कहना है कि बौद्ध सर्किट में कालसी के शिलालेख को शामिल किए जाने से जनजाति क्षेत्र कालसी अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के नक्शे पर आ जाएगा तथा सरकार की पर्यटन नीति को भी बढ़ावा मिलेगा। संवाद
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मौर्य वंश में स्थापित किया गया था शिलालेख
मौर्य वंश के सम्राट अशोक महान के शासनकाल में उत्तर भारत के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में शामिल कालसी में अशोक का शिलालेख स्थापित किया गया था। विदेशी पुरातत्वविद जॉन फॉरेस्ट ने वर्ष 1860 में इस क्षेत्र में खुदाई के दौरान इस शिलालेख की खोज की थी। शिलालेख पर प्राकृत भाषा व ब्रह्मी लिपि में लिखे गए संदेश सम्राट अशोक के आंतरिक प्रशासन के प्रति उनका दृष्टिकोण, प्रजा के साथ नैतिक एवं पितृ तुल्य संबंध, अहिंसा के लिए प्रतिबद्धता व युद्ध के परित्याग को दर्शाते हैं।

कालसी स्थित अशोक शिलालेख के प्रचार प्रसार के लिए पर्यटन विभाग अपने स्तर से प्रयास करता रहता है, परंतु पुरातात्विक महत्व के उपरोक्त संरक्षित स्थल को बौद्ध सर्किट से जोड़ने की कोई योजना फिलहाल विभागीय स्तर पर लंबित नहीं है। - जयपाल सिंह चौहान, जिला पर्यटन अधिकारी
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