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इतने सख्त न हो पर्यावरण नियम कि संरक्षण ही न हो
ब्यरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 01 Sep 2015 12:52 PM IST
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केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावडेकर ने सोमवार को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी के दीक्षांत समारोह में वन एवं पर्यावरण के नियमों में शिथिलता और बदलाव का इशारा किया। आईएफएस अफसरों के बैच को नसीहत देते हुए कहा कि नियमों को जकड़बंद न बनाएं।
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फिर महाराष्ट्र में ग्रेट इंडियन बस्टर (जीआईबी) पक्षी का उदाहरण दिया और कहा कि जब पक्षी के संरक्षण के लिए नियम बहुत अधिक सख्त किए गए तो लोगों ने इसका संरक्षण ही बंद कर दिया। पहले चार-पांच सौ जीआईबी होते थे और अब पांच-छह ही दिखते हैं।
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जंगलों में रहने वाले गरीब कैसे
जावडेकर ने कहा कि जंगल ‘रिच’ हैं तो जंगलों में रहने वाले लोग गरीब कैसे हो सकते हैं। ‘चीजों’ के नियम इतने सख्त कर दिए गए कि तस्करी होने लगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बदलते माहौल में वन और पर्यावरण के सामने नई चुनौतियां हैं इनका सामना वन के अंदर और आसपास रहने वालों को विश्वास में लेकर ही किया जा सकता है।
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लोगों का साथ जरूरी
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि स्थिति यह है कि लोग जंगलों को अपना ‘एरिया’ ही नहीं मानते। ऐसे में नई चुनौतियों का सामना करने के लिए लोगों का साथ होना जरूरी है। जावडेकर ने वन अफसरों को ‘इनोवेटिव’ बनने की सलाह दी। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री विदेशियों को नहीं विदेशों में रह रहे भारतीयों को वापस बुला रहे हैं ताकि वे अपने देश के विकास के लिए कार्य करें।