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नेपाल को ढाल बना भारत पर 'वार' करने की फिराक में चीन

Thu, 07 May 2015 08:28 AM IST
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 07 May 2015 08:28 AM IST
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terrorist can be active after earthquake.

नेपाल में भूकंप से पैदा हुए हालात भारतीय सीमांत क्षेत्रों में घुसपैठ को देखते हुए सुरक्षा एवं खुफिया एजेंसियां सतर्क हो गई हैं, लेकिन रक्षा मामलों के विशेषज्ञ इसके दूरगामी परिणामों को लेकर आशंकित हैं।

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विशेषज्ञों ऐसे स्थिति में चीन सीमा से सटे सेंट्रल सेक्टर यानि उत्तराखंड बार्डर को लेकर चिंतित है। त्रासदी से निपटने में नेपाल की लोकतांत्रिक सरकार जिन मुश्किल हालात में घिर हई है, उसका फायदा वहां निष्क्रिय बढ़े माओवादी उठा सकते हैं। आईबी सहित सुरक्षा एजेंसियां उत्तराखंड सहित अन्य सीमांत राज्य यूपी बिहार में स्थानीय पुलिस से संपर्क में हैं।
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उत्तराखंड की 275 किलोमीटर लंबी नेपाल से सटी सीमा का काली नदी वाला इलाका माओवादियों की सक्रियता का केंद्र रह चुका है। भूकंप से नेपाल में पैदा हुआ आर्थिक संकट के हालात आने वाले दिनों में और गहराएंगे।
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दुर्गम क्षेत्रों में बसे नेपाली गांव सरकार की उपेक्षा की दुहाई दे रहे हैं। वहां बन रहे हालात चीन के बढ़ते दखल के साथ नेपाल की आईएसआई एजेंसी की सक्रियता से आतंकवादी घुसपैठ की गतिविधियों के बढ़ सकती है।

नेपाल में बढ़ेगा चीन का दखल

terrorist can be active after earthquake.

भूकंप के बाद नेपाल में भारत के अलावा सबसे सक्रिय चीन है। नेपाल में माओवाद के दौर में चीन का उनका समर्थन मिलता रहा है। अब जिस तरह के हालात नेपाल में पैदा हुए हैं उससे चीन नेपाल में अपना राजनीतिक फायदा देख रहा है। चीन के अलावा पाकिस्तान की आईएसआई वहां पहले से सक्रिय है।

कालापानी का क्षेत्र संवेदनशील

उत्तराखंड नेपाल सीमा पर काला पानी का इलाका विवादस्पद है। लगभग चार सौ वर्ग किलोमीटर के इस क्षेत्र को नेपाल अपना हक जताता रहा है। यह क्षेत्र माओवादियों के निशाने पर भी रहा है। नेपाल में एक दशक तक माओवाद के सक्रिय दौर में इस क्षेत्र में यहां मीलों फैला जंगल उनकी गतिविधियों का केंद्र रहा है।

चीन नेपाल मामलों के रक्षा विशेषज्ञ लेफ्टिनेंट जनरल एमसी भंडारी (रि) मानते हैं कि भूकंप के बाद नेपाल में हालात विद्रोही ताकतों के लिए अनुकूल होते दिख रहे हैं। डर है कि दोबारा माओवाद के हालात पैदा न हो जाएं। इसके लिए वहां पर्याप्त कारण हैं जिसमें आर्थिक व्यवस्था का शून्य हो जाना। जनता का समर्थन सरकार के प्रति खत्म होना और विद्रोह के लिए एक लीडरशिप का होना। इन स्थितियों में काम्युनिस्ट पार्टी आफ नेपाल फिर से एक्टिव होगी जिसका फायदा चीन उठाएगा। वर्ष 1996 से 2006 के बीच नेपाल के 75 से 67 जनपद माओवाद के प्रभाव में थे। रह चुके हैं। ऐसे में भारत को वहां लोकतांत्रिक सरकार के बनाए रखने में विश्व स्तर पर कूटनीतिक पहल कर मौजूदा सरकार को अन्य राष्ट्रों का समर्थन दिलाना होगा। रक्षा बलों के लिए अब चीन सीमा वाला सेंट्रल सेक्टर अहम हो गया है जिसमें उत्तराखंड के लिए बढ़ी चिंता कालापानी वाला क्षेत्र है।

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