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26/11 में हुए हमले का हीरो है ये सपूत
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 27 Nov 2013 09:59 AM IST
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पांच बरस पहले मुंबई में 26/11 के आतंकी हमले में उत्तराखंड के सपूत हवलदार गजेंद्र सिंह बिष्ट ने अदम्य साहस से आतंकियों के नापाक इरादों को कामयाब नहीं होने दिया।
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नेरिमेन हाउस में आतंकियों के खिलाफ बोला हमला
नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (एनएसडी) की 51 विशेष दस्ते में शामिल हवलदार गजेंद्र ने नेरिमेन हाउस में जमे आतंकियों के खिलाफ जवाबी हमला बोला था।
दुश्मन की गोलियों और हथगोले से गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद अपने टीम को आतंकियों से सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जिसके लिए उन्हें मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया।
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देहरादून के पास एक छोटे से कस्बे गणेशपुर निवास गजेंद्र सिंह ने मुंबई में हुए आतंकवादियों के हमले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
10 पैरा के हवलदार गजेंद्र ने बतौर कमांडो एनएसजी ज्वाइन की थी, जिसके जिम्मे मुंबई हमले में आतंकियों से उनका महत्वपूर्ण ठिकाना नेरिमेन हाउस मुक्त करवाना था।
नेरिमेन हाउस की छत पर जिस समय गजेंद्र सहित दूसरे कमांडों उतरे तो 6 नागरिक आतंकवादियों के कब्जे में थे। टीम को लीड करते हुए जब गजेंद्र बहुमंजिला भवन में दाखिल हुए तो आतंकियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।
टीम को आगे बढ़ने में सहयोग किया
टीम को लीड करते हुए गजेंद्र ने आतंकियों तक पहुंचने के लिए एक सुरक्षित स्थान चाहिए था जहां से जवाबी हमला बोल कर उन्हें ढेर किया जाता।
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गजेंद्र ने भारी गोलीबारी के बीच टीम को आगे बढ़ने में सहयोग किया, लेकिन अचानक दुश्मन का एक हथगोला ठीक उनके पास फटा।
घायल होने के बावजूद वह पीछे नहीं हटे और गोलियों की बौछार में टीम को एक सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। इस हमले में वह गंभीर रूप से घायल हुए और बाद में दम तोड़ दिया।
उनके इस बलिदान के लिए उन्हें मरणोपरांत शांतिकाल का सर्वोच्च सैन्य वीरता अलंकार अशोक चक्र प्रदान किया गया।
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