मकर संक्रांति पर भरपूर होगा गंगाजल, टिहरी डैम से छोड़ा पानी
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मकर संक्रांति पर्व पर श्रद्धालुओं को देवप्रयाग, हरिद्वार, इलाहाबाद और गंगा सागर में डुबकी लगाने के लिए भरपूर जल मिलेगा। पर्व को देखते हुए टिहरी बांध प्रशासन झील में 80 क्यूमैक्स अतिरिक्त पानी छोड़ रहा है।
इस वर्ष बारिश कम होने के कारण नदियों के जलस्तर में कमी आई है, लेकिन अर्द्धकुंभ स्नान पर्व के लिए बांध प्रशासन ने पानी की कमी न होने देने का निर्णय लिया है। नियमित रूप से पानी छोड़ने की कार्ययोजना तैयार की है।
मकर संक्रांति पर देवप्रयाग, हरिद्वार, इलाहाबाद और गंगा सागर समेत कई तीर्थ स्थलों पर गंगा स्नान किए जाने की परंपरा है। माना जाता है कि इन पर्वों पर गंगा स्नान से मोक्ष और शुभ फल मिलता है। इस बार मौसम की बेरुखी के चलते बारिश नहीं होने के कारण नदियों के जलस्तर में गिरावट आने से बांध प्रशासन दुविधा की स्थिति में है।
25 दिसंबर से अतिरिक्त पानी छोड़ रहा बांध प्रशासन
बुधवार को भागीरथी और भिलंगना नदी में 56.5 क्यूमैक्स पानी दर्ज किया गया है, जबकि वर्ष 2015 में जनवरी द्वितीय सप्ताह में भागीरथी ओर भिलंगना में 65 क्यूमैक्स पानी आ रहा था। निरंतर पानी की कमी होने के कारण बुधवार को टिहरी झील का जलस्तर 796.8 आरएल (रिजर्व वाटर लेबल) मीटर दर्ज किया गया, जबकि पिछले साल मकर संक्रांति के समय झील का जलस्तर 807 आरएल मीटर था।
अर्द्धकुंभ और मकर संक्रांति के स्नान को देखते हुए बांध प्रशासन ने बीते 25 दिसंबर से रोजाना 225 क्यूमैक्स पानी छोड़ना शुरू कर दिया था। इससे पहले झील से 145 क्यूमैक्स पानी छोड़ा जा रहा था।
इनका है कहना
पर्व की महत्ता को देखते हुए झील से 80 क्यूमैक्स अतिरिक्त पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं को गंगा तटों पर पानी की पूर्ण उपलब्धता हो सके। इसके बाद आगे के कुंभ और स्नान पर्वों के दौरान भी मांग के हिसाब से पानी छोड़ा जाएगा।
-एचएल अरोड़ा, जीएम, ओएमएस टीएचडीसी