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Teacher's Day Special: इस शिक्षक की मेहनत ने विजय को बनाया विश्व विजेता, पढ़कर आप भी करेंगे गर्व

Tue, 05 Sep 2017 01:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 05 Sep 2017 01:16 AM IST
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Teachers day 2017 Satish Baluni untold story for his disabled student

कौन कहता है क‌ि आसमान में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्‍थर तो तब‌ियत से उछालो यारो। इसी शायरी को आधार बनाकर इस श‌‌िक्षक ने अपने छात्र के ल‌िए वो काम कर द‌िखाया जो क‌िसी ने सोचा भी नहीं होगा।  बेहद गरीब और मानसिक रूप से कमजोर छात्र को एक शिक्षक ने संवार कर विश्व विजेता बना दिया।

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शिक्षक ने न केवल छात्र को कोचिंग दी बल्कि उसके खेल को आगे बढ़ाने के लिए अपनी तनख्वाह तक लगा दी। छात्र ने भी निराश नहीं किया और शिक्षक की उम्मीदों से कई गुना बेहतर प्रदर्शन कर अमेरिका में देश के लिए गोल्ड मेडल जीता। हालांकि देश को स्वर्णिम सफलता दिलाने वाले टीचर को शिक्षा विभाग ने एक प्रशस्ति पत्र तक देना गंवारा नहीं किया।
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यह मिसाल टिहरी गढ़वाल के राजकीय इंटर कॉलेज खोला कड़ाकोट, कीर्तिनगर के शिक्षक सतीश बलूनी से जुड़ी है। 2010-11 में मानसिक रूप से कमजोर छात्र विजय सिंह ने स्कूल में प्रवेश लिया। उसकी कद-काठी और खेलों के प्रति लगाव को देखते हुए शिक्षक सतीश बलूनी ने नियमित अभ्यास के लिए प्रोत्साहित किया। गरीब विजय के पास अभ्यास के लिए जूते तक नहीं थे।
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तब सतीश ने उसे जूते दिलाए और कोचिंग दी। वह अपने खर्च पर विजय को अलग-अलग स्तरों पर होने वाली खेत प्रतियोगिताओं में हिस्सा दिलाने के लिए खुद लेकर जाते। युवा कल्याण और खेल मंत्रालय की ओर से 2013 में अजमेर, राजस्थान में आयोजित नेशनल मयास गेम्स में विजय ने 400 मीटर दौड़ में देशभर में दूसरा स्थान हासिल किया।

सतीश को संवारने वाले शिक्षक को भूली सरकार

Teachers day 2017 Satish Baluni untold story for his disabled student
Satish Baluni

इसके बाद मार्च 2014 में जवाहर लाल स्टेडियम नई दिल्ली में आयोजित स्पेशल चिल्ड्रन नेशनल गेम्स में विजय ने 400 मीटर में गोल्ड और 800 मीटर में सिल्वर मेडल जीता।
यहीं से उसका चयन लास एंजिलिस, अमेरिका में आयोजित होने वाले स्पेशल वर्ल्ड समर गेम्स-2015 के लिए हुआ। प्रतियोगिता के लिए विजय का पासपोर्ट बनवाने समेत अन्य छोटे-मोटे खर्च सतीश ने ही किए।

दसवीं कक्षा के छात्र विजय ने दुनियाभर के खिलाड़ियों को पछाड़कर आठ सौ मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल जीता था। वहीं चार सौ मीटर दौड़ में कांस्य पदक अपने नाम किया था। चार गुणा चार सौ मीटर रिले में भी विजय को टीम स्पर्द्धा का कांस्य पदक मिला था।

इतना कुछ करने के बाद भी सतीश बलूनी को वह सम्मान नहीं मिला, जिसके वह हकदार थे। सरकार ने विजय की उपलब्धियों को तो सराहा लेकिन उसे वहां तक पहुंचाने वाले सतीश को भूल गई। सतीश के विभाग तक ने उसको सम्मान देना उचित नहीं समझा।

शिक्षक सम्मान के लिए उनके आवेदनों को अस्वीकार कर दिया गया, इससे सतीश खासे आहत हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें कम से कम विभाग की ओर से एक प्रशस्ति पत्र तो मिलना ही चाहिए था। इससे अन्य शिक्षक भी बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित होते।

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