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शिक्षकों का आने-जाने में गुजर रहा पढ़ाने का समय
अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
Updated Wed, 20 Nov 2013 07:01 PM IST
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शिक्षकों के दूरस्थ क्षेत्रों से स्कूल आने के मामले में रुद्रप्रयाग जिले की हालत सुधरने का नाम नहीं ले रही है। यहां तो शिक्षक पौड़ी जिले के श्रीनगर से जिले के दूरस्थ स्कूलों में पहुंचते हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकारी स्कूलों में किस प्रकार की पढ़ाई होती होगी।
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लापरवाही के कारण सुधार नहीं
सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों में जागरूकता की कमी और शिक्षा विभाग की लापरवाही के कारण हालातों में सुधार नहीं हो पा रहा है। बीच-बीच में प्रशासन द्वारा छापामार अभियान चला कर कार्रवाई भी की जाती है। बावजूद इसके शिक्षकों का दूर-दराज से आना नहीं रुक रहा है। रुद्रप्रयाग के बच्छणस्यूं, भरदार, तल्ला नागपुर, रानीगढ़, कालीमठ और बड़मा आदि क्षेत्रों में शिक्षक प्रतिदिन 20 से 60 किलोमीटर दूर से आते हैं। यही वजह है कि जब कभी तबादलों की बात आती है, तो शिक्षक इन्ही क्षेत्रों में स्थित स्कूलों का विकल्प भरते हैं।
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टैक्सी चालकों के साथ अनुबंध
जुगाड़ वाले शिक्षक संबद्धीकरण करा लेते हैं। बच्छणस्यूं ऐसा क्षेत्र है, जहां शिक्षक श्रीनगर से प्रतिदिन आवागमन करते हैं। इसके लिए शिक्षकों ने टैक्सी चालकों के साथ अनुबंध किया हुआ है। कई ऐसे स्कूल हैं, जो रोड हेड से दो-तीन किलोमीटर ऊपर स्थित हैं। बताया जाता है कि जीप चालक सबसे पहले अंतिम छोर पर स्थित विद्यालय के प्वाइंट पर पहुंचते हैं।
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यहां निर्धारित समय से पूर्व शिक्षक विद्यालय बंद कर देते हैं। बरसात के दौरान कई बार बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग अकसर अवरुद्ध हो जाता है। ऐसे में शिक्षक स्कूल नहीं पहुंच पाते हैं।