उत्तराखंडः शिक्षकों का प्रमोशन अब और आसान
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उत्तराखंड प्रदेश में प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापक और जूनियर के सहायक अध्यापकों के लिए खुशखबरी है। उनका एलटी में समायोजन के लिए आठ साल की सेवा की अनिवार्यता समाप्त किए जाने की तैयारी है।
इसके लिए शिक्षा निदेशालय से शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। इसे मंजूरी मिली तो बेसिक के हजारों शिक्षकों के लिए यह बड़ी राहत होगी।
राजकीय प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक और जूनियर हाईस्कूलों के सहायक अध्यापक के एलटी में समायोजन के लिए कम से कम आठ साल की सेवा अनिवार्य है।
इसके बाद ही प्राथमिक के प्रधानाध्यापक और जूनियर के सहायक अध्यापकों का एलटी में समायोजन होता है, लेकिन अब इन शिक्षकों को बड़ी राहत मिलने जा रही है।
बीएड प्रशिक्षण और आठ साल की अनिवार्यता खत्म
एलटी में समायोजन के लिए बीएड प्रशिक्षण और आठ साल की अनिवार्यता को समाप्त किया जा रहा है, लेकिन बेसिक और जूनियर से एलटी में समायोजन के लिए विषय संयोजन की अनिवार्यता यथावत रहेगी।
खास बात यह है कि एलटी में समायोजन के बाद उनके चयन और प्रोन्नत वेतनमान के लिए पूर्व पद (बेसिक में) पर की गई सेवाओं को भी जोड़ा जाएगा। इससे पहले ऐसा न होने से बेसिक और जूनियर से एलटी में समायोजित होने वाले शिक्षकों को चयन वेतनमान का लाभ नहीं मिल पा रहा था।
वहीं बेसिक और जूनियर से एलटी के समायोजन के कोटे को 40 फीसदी किए जाने का प्रस्ताव है।
7670 प्रधानाध्यापक, 9063 हैं सहायक अध्यापक
प्रदेश में 12511 प्राथमिक विद्यालयों में 7670 प्रधानाध्यापक और 2957 जूनियर हाईस्कूलों में 9063 सहायक अध्यापक हैं। वहीं प्रधानाध्यापक और सहायक अध्यापकों के कई पद रिक्त हैं।