फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   teacher problem in uttarakhand

'डराती हैं हेडिंग, नहीं चाहता अखबारों में बने मजाक'

Mon, 13 Oct 2014 09:55 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 13 Oct 2014 09:55 PM IST
विज्ञापन
teacher problem in uttarakhand

पहाड़वासियों के लंबे संघर्षों के बाद उत्तराखंड का गठन हुआ, लेकिन राज्य बनने के बाद पहाड़ के ही रहने वाले शिक्षकों, कर्मचारियों को पहाड़ पर जाने के लिए विशेष भत्ता देना इस राज्य की विडंबना बन गया है।

विज्ञापन


मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सोमवार को जीआईसी मेहूंवाला में जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के अधिवेशन में यह बात कही। उन्होंने शिक्षकों को नसीहत देते हुए कहा कि प्रदेश में कई स्कूल बंदी की कगार पर हैं।
विज्ञापन


सरकारी स्कूलों में तीस हजार वेतन वाले शिक्षकों के बजाय अभिभावक निजी स्कूलों में महज 3000 रुपये मानदेय वाले शिक्षक के पास अपने बच्चों को भेजकर गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। शिक्षकों के स्कूल से नदारद रहने पर चिंता जताने के बाद सीएम ने शिक्षकों से ही पूछा, ‘कोई मुझे बताए कि शिक्षक स्कूल कैसे पहुंचेंगे?’
विज्ञापन
विज्ञापन


सीएम ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी अकसर कुमाऊंनी गीत अल्मोड़ा की लाल माटी की सीढ़ी... गुनगुनाते हैं। कहा कि यही हाल शिक्षा विभाग का हो गया है।

लाल मिट्टी की सीढ़ी पर कोई चढ़ने के लिए जितना जोर लगाता है, उतना ही तेजी से फिसलकर जमीन पर जा गिरता है। प्रदेश में करोड़ों खर्च कर हाईस्कूल, इंजीनियरिंग कालेज, आईटीआई खुले हैं। लेकिन इन पर लगी पूंजी के मुकाबले स्थिति सुधरने के बजाए बिगड़ती जा रही है।

...तो हो जाएंगे बाल साफ

teacher problem in uttarakhand

मुख्यमंत्री ने चुटकी लेते हुए कहा कि विभाग में इतना सब होने के बावजूद शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी के बाल न जाने कैसे काले ही बने हुए हैं। कहा कि विभाग की स्थिति से मैं इतना चिंतित हूं कि कुछ और वर्षों तक सीएम रहा तो मेरे पूरे बाल साफ हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि विभाग की बदहाली देख उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में वे सबसे अधिक चिंतित व्यक्ति हैं।

मैं आखिरी दम तक लड़ने वाला हूं
कर्मचारियों की हड़ताल और सरकार पर कमजोर होने के आरोपों की ओर इशारा करते हुए सीएम ने कहा कि कुछ लोग गलतफहमी में हैं, कुछ नारेबाजी से परेशान करना चाहते हैं, लेकिन मैं इससे नहीं डरता। मैंने खुद जीवन भर यही सब किया है। मैं आखिरी दम तक लड़ने वाला व्यक्ति हूं।

चिंताराम और भीम सिंह बिष्ट हैं मेरे गुरुजी
सीएम ने कहा कि छोटी कक्षाओं में बच्चा जो सीखता है, उससे ही उसका भविष्य तय होता है। बताया कि प्राथमिक शिक्षा के दौरान उनके गुरु चिंताराम और भीम सिंह बिष्ट ने जो सिखाया वह उन्हें अब तक याद है।

सुबह-सुबह चाय का प्याला डगमगाने लगता है

teacher problem in uttarakhand

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें हर रोज अखबारों की हेडिंग ‘गरजे शिक्षक’ डरा देती है। सुबह-सुबह चाय का प्याला डगमगाने लगता है। सीएम ने कहा कि वे सब कुछ करने के लिए तैयार हैं, लेकिन शिक्षक भी तो उनका मनोबल बढ़ाने के लिए तैयार हों। कहा कि प्रदेश के कई स्कूलों में प्रॉक्सी टीचर रखने के मामले सामने आ रहे हैं, यह ठीक नहीं है।

कहा था न, मुझे मत बुलाना
सीएम ने जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ पदाधिकारियों से कहा, मैंने पहले ही कहा था न कि मुझे किसी समारोह में न बुलाया जाए। बता भी दिया था कि दिल से कुछ कह दूंगा तो आप लोग परेशान हो जाएंगे। फिर भी आपने बुला ही लिया।

जूनियर को माध्यमिक कहते रहे सीएम  
अधिवेशन जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ का था, लेकिन पूरे कार्यक्रम में मुख्यमंत्री बार-बार माध्यमिक के शिक्षक बोलते रहे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed