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पहाड़ के शिक्षकों को लगी एक ही 'बीमारी'
अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 22 Nov 2013 11:01 PM IST
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उत्तराखंड में दुर्गम तैनाती पर जाने से बचने के लिए शिक्षक कोई भी जुगत भिड़ाने से बाज नहीं आ रहे हैं। शिक्षकों ने अब एक्यूट आर्थोराइटिस बीमारी के बहाने विभाग को गच्चा देना शुरू कर दिया है।
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इसे शिक्षा विभाग की स्थानांतरण नियमावली में शामिल किए जाने के बाद से पर्वतीय क्षेत्र के हर शिक्षक को यही बीमारी लग गई है।
राज्य चिकित्सा परिषद के सदस्यों ने इस संबंध में महानिदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा को पत्र भेजा है।
इसमें एक्यूट आर्थोराइटिस बीमारी को हटाकर उसके स्थान पर क्रोनिक आर्थोराइटिस विद डिफॉर्मिटी विद डिस्एबिलिटी को स्थानांतरण नियमावली में शामिल किए जाने के लिए कहा गया है।
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परिषद के सदस्यों ने यह भी कहा है कि विभागीय स्थानांतरण नियमावली में शामिल किए जाने वाले रोगों के संबंध में परिषद से भी मशविरा किया जाना चाहिए।
परिषद ने कहा है कि एक्यूट आर्थोराइटिस का इलाज सभी जिला, संयुक्त और बेस चिकित्सालयों में उपलब्ध है। अमूमन 40 साल की उम्र के बाद हर किसी को यह दिक्कत हो जाती है।
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यह आम परेशानी है और दर्द नाशक टेबलेट इसका इलाज है। अगर इस बीमारी के नाम पर पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षकों की तैनाती रोकी गई तो वहां एक भी शिक्षक नहीं बचेगा। परिषद के सदस्यों में सीएमओ डा. गुरपाल सिंह, डा. बीसी रमोला, डा. वाईएस थपलियाल आदि रहे।