नकली डिग्री, असली नौकरी : प्रमाणपत्रों का सत्यापन के लिए एसआईटी को पांच लाख का बजट स्वीकृत
- 4.70 लाख रुपये से होगा शिक्षकों के तीन हजार प्रमाणपत्रों का सत्यापन
- मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और यूपी की कई यूनिवर्सिटी ने सत्यापन के एवज में मांगी थी धनराशि
- धन की कमी के चलते एसआईटी लंबे समय से नहीं करा पा रही थी सत्यापन
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शिक्षा विभाग में अमान्य डिग्री से नियुक्तियों के मामले में लंबे समय से अटके शिक्षकों के तीन हजार प्रमाणपत्रों के सत्यापन की राह अब आसान हो गई है। मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तर प्रदेश की कई यूनिवर्सिटी के प्रमाणपत्रों के सत्यापन के बदले धनराशि की मांग करने से एसआईटी इन प्रमाणपत्रों को आगे नहीं बढ़ा पा रही है। पुलिस मुख्यालय ने पांच लाख की धनराशि आवंटित की है, जिसमें से करीब चार लाख 70 हजार रुपये सत्यापन में खर्च होंगे। यह धनराशि जल्द एसआईटी (सीबीसीआईडी) को मिलने की उम्मीद है।
शिक्षा विभाग में नकली डिग्री से नौकरी पाने के खेल का भंडाफोड़ अमर उजाला ने किया था। अमर उजाला की मुहिम का संज्ञान लेकर शासन ने जांच कराने के आदेश दिए थे। अगस्त 2017 में सीबीसीआईडी की तत्कालीन अपर पुलिस अधीक्षक श्वेता चौबे की अगुवाई में एसआईटी गठित की गई थी। एसआईटी के प्रयास रंग लाए और शिक्षा विभाग में नियुक्तियों में फर्जीवाड़ा उजागर होता चला गया।
एसआईटी की संस्तुति के बाद अमान्य डिग्री से नौकरी पाने वाले शिक्षकाें के खिलाफ एफआईआर और दूसरी विभागीय कार्रवाई भी हुई। इसी बीच चौबे के स्थानांतरित होने के बाद जांच पर ब्रेक सा लग गया। उसकी बड़ी वजह यह थी कि शिक्षकाें के प्रमाणपत्राें के सत्यापन को कई राज्यों की यूनिवर्सिटी ने बाकायदा पत्र भेजकर निर्धारित धनराशि की डिमांड की थी, जिसमें कहीं प्रति प्रमाणपत्र दो सौ रुपये तो कहीं तीन सौ से लेकर पांच सौ रुपये की मांग की गई। एसआईटी की अपर पुलिस अधीक्षक सरिता डोभाल ने धनराशि के लिए शासन और पुलिस मुख्यालय को अवगत कराया लेकिन धन उपलब्ध कराने में हीलाहवाली की जाती रही।
कई राज्याें की यूनिवर्सिटी से होना है सत्यापन
एएसपी सरिता डोभाल के बाद आईपीएस मणिकांत मिश्रा को एसआईटी का प्रभार मिला। उनके सामने भी संकट बजट का ही था। सूत्रों के मुताबिक शिक्षकाें के करीब तीन हजार प्रमाणपत्रों का सत्यापन कई राज्याें की यूनिवर्सिटी से होना है। सत्यापन के बाद ही साफ होना है कि वो प्रमाणपत्र मान्य हैं अथवा अमान्य। प्रमाणपत्रों के हिसाब से एसआईटी को चार लाख 70 हजार रुपये की दरकार है।
आईपीएस मणिकांत मिश्रा ने पुलिस के आला अफसरों से मिलकर सत्यापन प्रक्रिया को अतिरिक्त धन उपलब्ध कराने की मांग की थी। पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था अशोक कुमार ने गंभीरता दिखाते हुए प्रमाणपत्रों के सत्यापन को पांच लाख रुपये का बजट उपलब्ध कराया है। एसआईटी प्रभारी मिश्रा ने बताया कि धनराशि उपलब्ध होते ही प्रमाणपत्रों के सत्यापन की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
पांच और शिक्षकाें की डिग्री अमान्य
एसआईटी की जांच में पांच और शिक्षकाें की डिग्री अमान्य पाई गई है। एसआईटी ने संबंधित अधिकारियों से कुछ बिंदुओं पर और रिपोर्ट मांगी है। इन शिक्षकों के खिलाफ जल्द ही एफआईआर की संस्तुति शिक्षा निदेशालय को भेजने की तैयारी है। बता दें कि अब तक 79 शिक्षकाें के शैक्षिक, जाति और मूल निवास प्रमाणपत्र फर्जी पाए जा चुके हैं।