शिक्षक नियुक्ति फर्जीवाड़ा: 34 शिक्षकों की सूची से गायब हुए तीन नाम, एक और के खिलाफ मुकदमा दर्ज
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उत्तराखंड में शिक्षकों की नियुक्ति में हुए फर्जीवाड़े की जांच में एसआईटी को शिक्षा विभाग का सहयोग नहीं मिल पा रहा है। वहीं, इस तरह के शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर शिक्षा निदेशालय ने जनपदों से जो रिपोर्ट मांगी है, उस सूची में तीन शिक्षकों के नाम गायब हैं।
अपर शिक्षा निदेशक ने कहा कि प्रकरण की जांच की जाएगी। इसमें यह दिखवाया जाएगा कि कहीं ये माध्यमिक के शिक्षक तो नहीं हैं। यदि ऐसा हुआ तो इनकी माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से रिपोर्ट भेजी गई होगी।
प्रदेश में शिक्षकों की नियुक्ति में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया था। कई शिक्षक फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नियुक्ति पा गए थे। अमर उजाला में इस खबर के प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद सरकार की ओर से पूरे प्रकरण की एसआईटी जांच के आदेश दिए गए थे।
एसआईटी प्रकरण की जांच कर रही है, लेकिन जांच में एसआईटी को विभाग का पूर्ण सहयोग नहीं मिल पा रहा है। इस बात का पता इससे भी लगता है कि शिक्षा निदेशालय की ओर से हरिद्वार, देहरादून, रुद्रप्रयाग, पौड़ी, ऊधमसिंह नगर और चमोली के जिला शिक्षा अधिकारियों को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि निदेशालय स्तर से जनपदों को फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नियुक्ति पाने वाले शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई संबंधी सूचना के निर्देश दिए गए, लेकिन संबंधित अधिकारियों की ओर से इसकी अनदेखी की जा रही है।
पूर्व में जेल जा चुके हैं तीनों शिक्षक
बार-बार के निर्देश के बाद भी एसआईटी को इससे संबंधी सूचना उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। शिक्षा निदेशालय से जनपदों को जारी इस पत्र में 31 शिक्षकों के नाम की सूची भेजी गई है।
जिनके खिलाफ अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी गई है, लेकिन इस सूची में हरिद्वार जनपद के भगवानपुर विकासखंड के उन तीन शिक्षकों के नाम नहीं हैं, जो नियुक्ति फर्जीवाडे़ में पूर्व में जेल जा चुके हैं। हालांकि पत्र में यह भी कहा गया है कि कोई अन्य शिक्षक हो तो उसका नाम भी शामिल किया जाए।
धोखाधड़ी में पौड़ी के शिक्षक के खिलाफ मुकदमा दर्ज
अपर शिक्षा निदेशक महावीर सिंह बिष्ट के मुताबिक पौड़ी में एक व्यायाम शिक्षक की नियुक्ति में फर्जीवाड़ा सामने आया है। शिक्षक ने अपनी मां के सरकारी नौकरी में कार्यरत होने के बावजूद पिता की मौत के बाद मृतक आश्रित के रूप में नियुक्ति पा ली। जो वर्ष 2014 से विभाग में कार्यरत है।
अपर निदेशक के मुताबिक राजकीय इंटर कालेज हीराखाल यमकेश्वर पौड़ी के सहायक अध्यापक व्यायाम नंद किशोर रतूड़ी के शिक्षक पिता की मौत हो गई थी, उनकी मौत के बाद नंदकिशोर ने मृतक आश्रित के रूप में नियुक्ति पा ली। जबकि उसकी मा सरकारी सेवा में थीं। अपर निदेशक ने कहा कि मृतक आश्रित शासनादेश के मुताबिक पति या पत्नी कोई सरकारी सेवा में है तो उनके बच्चे मृतक आश्रित के रूप में नियुक्ति नहीं पा सकते, लेकिन इस मामले में आरोपी शिक्षक की ओर से झूठा शपथ पत्र देकर शिक्षा विभाग में नियुक्ति पा ली गई थी।