उत्तराखंड: टैक्सी बिल घोटाले में इन 10 अफसरों पर गिरी गाज, होगी डेढ़ करोड़ रुपये की वसूली
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स्वास्थ्य विभाग में हुए टैक्सी बिल घोटाले में दोषी 10 अधिकारियों से करीब डेढ़ करोड़ रुपये की वसूली करने के लिए राजभवन ने अनुमति दे दी है। शुक्रवार (आज) को विभाग की ओर से दोषी अधिकारियों से वसूली करने के आदेश जारी हो सकते हैं।
वर्ष 2008 से 2013 तक स्वास्थ्य विभाग में करीब डेढ़ करोड़ का टैक्सी बिल घोटाला हुआ था। इस घोटाले में तत्कालीन 12 सीएमओ, सीएमएस स्तर के अफसर व दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के पांच निजी सचिव दोषी पाए गए थे। प्रदेश सरकार की ओर से दोषियों से घोटाले की रकम वसूली की कार्रवाई शुरू की गई।
राज्य लोक सेवा आयोग ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ वसूली की मंजूरी दे दी थी। अब राजभवन ने भी इस कार्रवाई की अनुमति दे दी है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर सरकार ने कार्रवाई तो कर दी है, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक व विजय बहुगुणा के पांच निजी सचिवों से वसूली पर कार्रवाई करने को लेकर फिलहाल कोई निर्णय नहीं लिया गया।
इन अधिकारियों को पाया गया था दोषी
राजभवन की अनुमति के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई तय है। शुक्रवार को इस संबंध में शासन स्तर पर आदेश जारी किए जा सकते हैं। इस संबंध में सचिव स्वास्थ्य नितेश झा का कहना है कि टैक्सी बिल घोटाले में दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के संबंध में विभाग की ओर से भी आदेश जारी किए जाएंगे।
टैक्सी बिल घोटाले में डॉ.आरएस असवाल, डॉ.जीसी नौटियाल, डॉ.एमपी अग्रवाल, वीके गैरोला, डॉ.आरके पंत, डॉ.दीपा शर्मा, डॉ.मीनू, एसडी सकलानी, राकेश सिन्हा और वाईएस राणा को दोषी पाया गया। अब इन अधिकारियों से वसूली की जाएगी।