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गांव-गांव पुस्तकालय की पहल से बच्चों की नहीं छूटी पढ़ने की आदत
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बीते साल कोरोना के चलते लॉकडाउन की वजह से देशभर के स्कूलों पर ताला लग गया था। इससे बच्चों की पढ़ाई-लिखाई ठप हो गई। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई से जोड़ने के लिए हिमोत्थान टाटा ट्रस्ट ने सर्व शिक्षा अभियान के सहयोग से प्रदेशभर के ग्रामीण बच्चों को पुस्तकालयों से जोड़ा।
संस्था के टीम लीडर मनीष के झा ने बताया कि लंबे समय से घर पर रहने से बच्चे मानसिक अवसाद का शिकार हो रहे थे। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई एवं उनके मानसिक स्वास्थ्य दुरुस्त रखने के उद्देश्य से गांवों में पुस्तकालय स्थापित करने के साथ विभिन्न शिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। गांव-गांव पुस्तकालय के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतघरों में पुस्तकालय स्थापित किए गए। इसमें सभी विषयों की पुस्तकें भी उपलब्ध कराई गईं। संस्था की ओर से प्रदेश के 120 गांवों में पुस्तकालयों की स्थापना की जा चुकी है। इनमें करीब 12 हजार बच्चों को शिक्षण कार्यक्रम से जोड़ा गया है। इसके लिए 400 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया। साथ ही बच्चों के लिए समय-समय पर ऑनलाइन शिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। कार्यक्रम में सप्ताह के चार दिन सोमवार से शुक्रवार तक बच्चों के साथ कविताओं, कहानियों, क्विज, आर्ट-क्राफ्ट एवं शारीरिक साक्षरता के लेखा साझा किए गए। संस्था से जुड़े स्वयंसेवक घर-घर जाकर जागरूक करते हैं। साथ ही शिक्षकों एवं अभिभावकों को भी घर पर रहकर बच्चों को पढ़ाई से जोड़े रखने की कोशिश की गई है।
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संस्था के टीम लीडर मनीष के झा ने बताया कि लंबे समय से घर पर रहने से बच्चे मानसिक अवसाद का शिकार हो रहे थे। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई एवं उनके मानसिक स्वास्थ्य दुरुस्त रखने के उद्देश्य से गांवों में पुस्तकालय स्थापित करने के साथ विभिन्न शिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। गांव-गांव पुस्तकालय के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतघरों में पुस्तकालय स्थापित किए गए। इसमें सभी विषयों की पुस्तकें भी उपलब्ध कराई गईं। संस्था की ओर से प्रदेश के 120 गांवों में पुस्तकालयों की स्थापना की जा चुकी है। इनमें करीब 12 हजार बच्चों को शिक्षण कार्यक्रम से जोड़ा गया है। इसके लिए 400 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया। साथ ही बच्चों के लिए समय-समय पर ऑनलाइन शिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। कार्यक्रम में सप्ताह के चार दिन सोमवार से शुक्रवार तक बच्चों के साथ कविताओं, कहानियों, क्विज, आर्ट-क्राफ्ट एवं शारीरिक साक्षरता के लेखा साझा किए गए। संस्था से जुड़े स्वयंसेवक घर-घर जाकर जागरूक करते हैं। साथ ही शिक्षकों एवं अभिभावकों को भी घर पर रहकर बच्चों को पढ़ाई से जोड़े रखने की कोशिश की गई है।
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