दून में बैठी ठगों की फौज ने विदेशियों को ऐसे लगाया करोड़ों का चूना, कॉल सेंटरों से चलता था 'खेल'
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दून में बैठी ठगों की फौज ने अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के सैकड़ों लोगों को करोड़ों रुपये का चूना लगा दिया। कॉल सेंटर में बैठे ये ठग उनके कंप्यूटर पर माइक्रोसॉफ्ट के फर्जी पॉप अप (चेतावनी संदेश) भेजते और फिर इसे हटाने के लिए डॉलर में पैसा वसूलते थे।
माइक्रोसॉफ्ट कंपनी और कनाडा पुलिस को जब इसका पता चला तो उन्होंने देहरादून पुलिस से संपर्क किया। इस पर मंगलवार देर रात पटेलनगर और क्लेमेंटटाउन थाना क्षेत्र में चार कॉल सेंटर में छापा मारकर पांच लोगों को गिरफ्तार किया।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक निवेदिता कुकरेती ने बताया कि करीब दस दिन पहले रॉयल कनेडियन माउंटेड पुलिस ने उन्हें सूचना दी थी कि देहरादून से कुछ लोग वहां के नागरिकों को ठग रहे हैं।
इस सूचना पर गोपनीय जांच की गई। मंगलवार रात करीब दो बजे पुलिस की चार टीमों ने ट्रांसपोर्ट नगर स्थित संधू सेंटर और बिजनेस पार्क में चार कॉल सेंटरों में छापे मारे। यहां से पांच युवकों को गिरफ्तार किया गया।
इनमें रंजन कुमार निवासी डाल्टनगंज, पलामू, झारखंड, मयंक बंसल निवासी सेवला खुर्द, देहरादून, राजा लांबा निवासी सलाई, राजपुर, संदीप राणा निवासी चोइला, चंद्रबणी और अंशुल श्रीवास्तव निवासी जीएमएस रोड, देहरादून शामिल हैं।
इनके खिलाफ माइक्रोसॉफ्ट कंपनी के भारतीय कार्यालय के अधिकारी भूपेंद्र सिंह निवासी जीवन पार्क, उत्तम नगर, दिल्ली की ओर से पटेलनगर में एक मुकदमा और क्लेमेंटटाउन थाने में दो मुकदमे दर्ज कराए गए। आरोपियों के पास से 27 हार्ड डिस्क, चार सर्वर, तीन लैपटॉप, तीन मोबाइल और एक पेन ड्राइव बरामद की गई।
ये सभी आरोपी इन कॉल सेंटरों में 20-25 हजार रुपये प्रतिमाह की वेतन पर काम करते थे। कॉल सेंटरों में रजिस्टर भी मिले। इनमें उन्होंने किस व्यक्ति से कितने पैसे जमा करवाए उसका पूरा हिसाब-किताब लिखा हुआ है। आशंका है वे पिछले डेढ़ साल में विदेशियों से कई करोड़ की ठगी कर चुके हैं।
ऐसे लगाते थे चूना
पुलिस की जांच में सामने आया कि पांचों आरोपी उच्च शिक्षित और साइबर एक्सपर्ट हैं। ये कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में ऑनलाइन रहने वाले कंप्यूटर चलाने वालों को निशाना बनाते थे। इस पर वे अपने सर्वर से एक पॉप-अप (चेतावनी संदेश) भेजते थे। यह संदेश हूबहू माइक्रोसॉफ्ट कंपनी के पॉप अप जैसा होता था। इस पॉप अप के स्क्रीन पर आने से कुछ देर के लिए स्क्रीन ढक जाती थी और जैसे ही यूजर इस पर क्लिक करता तो उसे एक टॉल फ्री नंबर दिखता था।
इस नंबर पर फोन करने के लिए भी पॉप अप में लिखा होता था। इस पर जब यूजर कॉल करता था तो यहां बैठे ये लोग उसे हटाने के लिए शुल्क जमा करने को बताते थे। यह शुल्क 300 अमेरिकन डॉलर से 2500 डॉलर तक होता था। इस बीच जिस कीमत पर बात बन जाए वह रकम ऑनलाइन इनके खातों में ट्रांसफर करवाई जाती थी। पैसे आने के तत्काल बाद ये लोग उस पॉप अप को हटा देते थे। इस तरह उन्होंने हजारों लोगों को निशाना बनाया।
नहीं है कॉल सेंटरों का लाइसेंस
जिन कॉल सेंटर पर कार्रवाई हुई उनमें दो एस टेक्नोलॉजी, पेंटल और जेड कंपनी के एक-एक कॉल सेंटर हैं। इन चारों कॉल सेंटरों में से किसी के पास भी डिपार्टमेंट ऑफ टेली कम्यूनिकेशन का लाइसेंस नहीं है। इस पर इनके मालिकों के खिलाफ अलग से कार्रवाई की जाएगी। पुलिस के अनुसार बिजनेस पार्क और आईटी पार्क में ऐसे कॉल सेंटरों के खिलाफ अब अभियान चलाया जाएगा।
रिमांड पर लेकर होगी पूछताछ
कॉल सेंटरों के मालिक मूल रूप से झारखंड के रहने वाले बताए जा रहे हैं। ऐसे में गिरफ्तार आरोपियों की पुलिस कस्टडी रिमांड न्यायालय से मांगी गई है। एसएसपी ने बताया कि रिमांड में लेकर आरोपियों से विस्तृत पूछताछ की जाएगी।