गजब! यहां अक्टूबर में भी रसीले आम से लदे हैं पेड़
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लोग दशहरी, आम्रपाली, लंगड़ा जैसी महत्वपूर्ण प्रजाति के आमों का स्वाद जून-जुलाई में लेते थे, लेकिन पिथौरागढ़ में नाचनी के आमधार गांव के किसान जीवन दानू के यहां अक्टूबर में भी पेड़ पर आम लदे हैं।
जब वह इस आम की प्रजाति को पंत विवि में लगे किसान मेले में लेकर आए वैज्ञानिक भी आश्चर्यचकित रह गए। प्राथमिक जांच में यह आम उत्तम क्वालिटी का पाया गया।
आम की वैसे तो कई प्रजातियां हैं। सभी जून-जुलाई में पककर तैयार होती हैं। अब तक कोई लेट वैरायटी विकसित नहीं की जा सकी है।
पिथौरागढ़ जिले के नाचनी के गांव आमधार के किसान जीवन दानू के यहां आम का ऐसा पेड़ है जो अक्टूबर-नवंबर में फल देता है। जब दानू 250 से 300 ग्राम वजन के आमों लेकर किसान मेले में पहुंचे तो वैज्ञानिक भी हैरत में पड़ गए।
अन्य आमों से अधिक है मिठास
दानू ने आम को उद्यान विभाग के आम विशेषज्ञ डॉ. एके सिंह, डायरेक्टर रिसर्च डॉ. जेपी सिंह और उद्यान विभाग के डीन डॉ. जे कुमार को दिखाया।
लैब में इसकी प्रारंभिक जांच की गई तो यह उत्तम क्वालिटी का पाया गया। इससे वैज्ञानिकों को आम की लेट वैरायटी विकसित की संभावनाएं दिख रहीं हैं।
विवि के वैज्ञानिकों का कहना है कि मार्च में आमधार गांव जाकर आम के पेड़ को देखा जाएगा। साथ ही पेड़ की कलम को रिसर्च के लिए लगाया जाएगा। यदि प्रयोग सफल रहा तो नई प्रजाति विकसित की जा सकती है।
आम विशेषज्ञ डॉ. एके सिंह ने बताया कि 250 से 300 ग्राम वजन के इस आम में टीएसएस (कुल घुलनशील तत्व) 20 से 21 प्रतिशत है। इसकी मिठास अन्य आमों से अधिक है।
उन्होंने बताया कि विवि में आम की विभिन्न संकर प्रजातियों पर शोध चल रहा है। इसका उद्देश्य किसानों के बीच ऐसी प्रजातियों को लाना है जिसका परफारमेंस दशहरी, लंगड़ा और चौंसा से भी अच्छा होने के साथ ही लेट पकने वाला हो।