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पूर्व निर्धारित तिथि पर खोले जाएं बदरीनाथ धाम के कपाट, तिथि बदलना शास्त्रों के विरुद्ध: स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती
Fri, 24 Apr 2020 09:22 PM IST
अलका त्यागी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
Published by: अलका त्यागी
Updated Fri, 24 Apr 2020 09:22 PM IST
सार
- ज्योर्ति एवं शारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा, पूजा के लिए नियम न बदलें
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शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
ज्योर्ति एवं शारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने बदरीनाथ मंदिर के कपाट खोलने की तिथियों में परिवर्तन को शास्त्र विरुद्ध करार दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसा करना अनिष्टकारी और अशुभ सिद्ध होगा। महामारी के चलते देव शक्तियों को प्रसन्न किया जाता है, नाराज नहीं।
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शंकराचार्य मठ से जारी बयान में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि बदरीनाथ की प्रतिमा का स्पर्श केवल बाल ब्रह्मचारी ही कर सकता है। इसीलिए गृहस्थ डिमरी स्वयं पूजा न कर पूजा का थाल ब्रह्मचारी रावल को सौंपते हैं। यह जानकर आश्चर्य हुआ है कि केरल से रावल के आने के बावजूद कपाट खोलने की तिथि बदल दी गई है। जगद्गुरु ने कहा कि बदरीनाथ देश का पवित्र धाम है और कपाट खोलने के लिए शुभ मुहूर्त की आवश्यकता है।
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यह तिथि ईश्वर की प्रेरणा से निकाली जाती है। आश्चर्य की बात है कि उत्तराखंड सरकार ने केदारनाथ के कपाट खोलने की तिथि आगे बढ़ाकर फिर पीछे वापस ले ली जबकि सबसे बड़े धाम की तिथि में परिवर्तन कर दिया। उन्होंने कहा कि शंकराचार्यपीठ उन पुरोहितों को साधुवाद देती है, जो पुरातन नियमों के साथ खड़े होकर विरोध कर रहे हैं।
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