इस संत ने RSS को बताया ISIS से ज्यादा खतरनाक, पीएम मोदी को लिखा खत
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राजस्व के लिए खनन को जरूरी बताने के बयान पर मातृसदन ने आरएसएस और भाजपा पर तीखा हमला बोला है। मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद महाराज ने आरएसएस की तुलना आईएसआईएस जैसे खतरनाक आतंकी संगठन से कर डाली।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह सहित कई बड़े नेताओं को चिट्ठी भेजकर सवाल उठाया है कि क्या राजस्व के लिए गोहत्या से भी प्रतिबंध हटाएंगे। वहीं गंगा में खनन खुलने के विरोध में मातृसदन के ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद का तप/अनशन तीसरे दिन भी जारी रहा।
स्वामी शिवानंद ने पत्रकार वार्ता कर बताया कि आरएसएस और भाजपा अपना आदर्श गाय, गंगा और गीता को बताती है, लेकिन प्रदेश में भाजपा सरकार के मंत्री बयान जारी करते हैं कि राजस्व के लिए खनन जरूरी है। इस बाबत कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत को चिट्ठी भेजी गई है।
पीएम नरेंद्र मोदी, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अजय भट्ट को प्रतिलिपि भेजी गई है। जिसमें कहा गया है कि हरिद्वार से गो तस्करी होती है। उत्तराखंड में गोहत्या पर प्रतिबंध है।
केंद्र की सरकारों में आरएसएस के लोग ही सत्ता चला रहे
ऐसे राजस्व के लिए खनन को जरूरी बताने वाले आरएसएस और भाजपा सरकार के दिग्गज क्या गोहत्या से प्रतिबंध हटाने की संस्तुति भी करेंगे। स्वामी शिवानंद ने आरएसएस पर तल्ख तेवर दिखाते हुए आरोप लगाया कि आरएसएस देश के लिए आईएसआईएस से भी ज्यादा खतरनाक है।
क्योंकि आईएसआईएस तो आतंक फैलाता है और आरएसएस अंदर घुसकर देश को नुकसान पहुंचाती है। स्वामी शिवानंद ने कहा कि आरएसएस खुद को राजनीति से अलग रखने का दावा करती है, लेकिन प्रदेश से लेकर केंद्र की सरकारों में आरएसएस के लोग ही सत्ता चला रहे हैं। स्वामी शिवानंद ने गीता के श्लोक का हवाला देते हुए कहा कि गंगा साक्षात भगवान का स्वरूप है।
लेकिन ब्रह्मचारी निगानंद ने जिस गंगा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी, उसी गंगा को भाजपा सरकार खनन माफिया के साथ मिलकर नष्ट कर रही है। स्वामी शिवानंद ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने पहली बार बनारस पहुंचकर कहा था कि मुझे गंगा मैया ने यहां बुलाया है। उनकी सरकार गंगा को तहस नहस कर रही है।
स्वामी शिवानंद ने पूछा कि हरिद्वार में गंगा को खोदकर पातालगामिनी कर दिया जाएगा तो वह बनारस तक कैसे पहुंचेगी। पत्र में बताया गया कि श्यामपुर और भोगपुर क्षेत्र में 10 किलोमीटर के दायरे में कई स्टोन क्रशर हैं। इससे गंगा में खनन की विभीषिका का अंदाजा लगाया जा सकता है।