स्वामी शिवानंद का एम्स पर आरोपः अस्पताल में किया गया आत्मबोधानंद की हत्या का प्रयास
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मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि स्वामी सानंद की मौत के प्रति यूएनओ तक गंभीर है, लेकिन केंद्र और उत्तराखंड की सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही। गंगा के लिए सरकार की ओर से बनाए जा रहे एक्ट को मातृसदन खारिज करता है, वहीं उन्होंने आरोप लगाया कि एम्स में आत्मबोधानंद की हत्या करने का प्रयास किया गया।
स्वामी शिवानंद सरस्वती बुधवार को मातृसदन में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि लक्षण देखकर प्रतीत हो रहा है कि ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद को एम्स में कोई कैमिकल मिलाकर मारने का प्रयास किया जा रहा था।
इस बारे में प्रशासन से शिकायत की गई, लेकिन उन्होंने कोई संज्ञान नहीं लिया। अब आत्मबोधानंद के स्वास्थ्य में मातृसदन आकर काफी सुधार है, तो प्रशासन उन्हें एम्स में भर्ती कराने का प्रयास कर रहा है।
उन्होंने कहा संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरण विभाग ने अपने ब्लॉग के माध्यम से गंगा के मुद्दे पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया और गंगा पर बांध न बनाने और खनन न करने की हिदायत दी।
स्वामी शिवानंद ने कहा कि ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद ने अनशन शुरू करने से पूर्व 21 अक्तूबर को प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था। 30 अक्तूबर को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के मंत्रालय को पत्र ट्रांसफर कर दिया गया।
नितिन गडकरी द्वारा 26 नवंबर को पत्र का जवाब दिया गया जिसमें गंगा एक्ट के लिए स्वामी सानंद की मांगों को मान लिए जाने की बात कही गई है।
स्वामी शिवानंद ने कहा कि वास्तव में स्वामी सानंद की मांगों को नहीं माना गया है। देर से पत्र का जवाब देने से ही स्पष्ट होता है कि गंगा के प्रति सरकार गंभीर नहीं है और मातृसदन भी सरकार के एक्ट को रिजेक्ट करता है।