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हरिद्वार: गंगा संरक्षण के लिए स्वामी सानंद ने खोला मोर्चा, दस अक्टूबर से त्यागेंगे जल

Mon, 10 Sep 2018 07:36 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, हरिद्वार
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, हरिद्वार Updated Mon, 10 Sep 2018 07:36 AM IST
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Swami sanand will leave water for ganga protection
स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद

स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद उर्फ प्रोफेसर जीडी अग्रवाल ने गंगा रक्षा के लिए अपनी तरफ से तैयार ड्राफ्ट के आधार पर एक्ट बनाने के लिए केंद्र सरकार को नौ अक्तूबर तक का समय दिया है। मांग पूरी न होने पर वह दस अक्तूबर से जल भी त्यागने का एलान किया है।

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स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद गंगा की रक्षा के लिए एक्ट बनाने की मांग को लेकर 80 दिनों से मातृसदन में अनशनरत हैं। स्वामी सानंद ने 13 जून को प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था, लेकिन पत्र का कोई जवाब न आने पर वह 22 जून को अनशन पर बैठ गए थे। कुछ दिनों बाद प्रशासन ने उन्हें जबरन उठाकर एम्स में भर्ती कराया।
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कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद उन्हें वापस मातृसदन छोड़ा गया। केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने मातृसदन में स्वामी सानंद ने मिलकर अनशन समाप्त करने की अपील की। 13 अगस्त को डाक्टरों की सलाह पर सानंद को एम्स में फिर भर्ती कराया गया, लेकिन उन्होंने अपना अनशन नहीं तोड़ा।
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रविवार को मातृसदन में प्रेस वार्ता कर स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद ने दस अक्तूबर को जल भी त्यागने की घोषणा की। स्वामी सानंद ने कहा कि अभी तक केंद्र सरकार की ओर से कोई सार्थक पहल नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि वह 80 दिनों से नींबू पानी ही पी रहे हैं।  यदि सरकार ने नौ अक्तूबर तक मांग नहीं मानती है तो दस अक्तूबर से वे जल भी त्याग देंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें सरकारी ड्राफ्ट पर भरोसा नहीं है, क्योंकि सरकारी ड्राफ्ट में गंगा को व्यापार का माध्यम बना दिया है। जिसमें गंगा को पूरी तरह से सरकारी कर्मचारियों के हाथों में छोड़ दिया गया है। 

शिवानंद बैठेंगे अनशन पर

Swami sanand will leave water for ganga protection
स्वामी शिवानंद - फोटो : AmarUjala

नवरात्रों में ही चले जाएं प्राण
स्वामी सानंद ने कहा कि गंगा का अवतरण भी तीन पीढ़ियों के तप के बाद हुआ था। मातृसदन में गोकुलानंद और निगमानंद सरस्वती गंगा के लिए अपने प्राण त्यागी चुके हैं। यदि उनकी मृत्यु के बाद गंगा को न्याय मिलेगा तो वे चाहेंगे कि नवरात्रों में ही उनके प्राण चले जाएं।

शिवानंद बैठेंगे अनशन पर
सानंद के प्राण त्यागने की बात कहते ही स्वामी शिवानंद भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि स्वामी सानंद की मृत्यु होना स्वतंत्र भारत के लिए सबसे बड़ा अभिशाप होगा। उन्होंने कहा कि शासन और प्रशासन ने स्वामी निगमानंद को मारने का षड्यंत्र रचा। उन्होंने कहा कि जल त्यागने के बाद जिस दिन स्वामी सानंद की मृत्यु होगी उसी दिन से वे स्वयं आमरण अनशन शुरू करेंगे।
 

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