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Haridwar: 21 नवंबर के बाद धर्म सेंसर बोर्ड के गठन की कवायद, पढ़ें स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बयान के पीछे वजह

Wed, 16 Nov 2022 08:55 AM IST
रेनू सकलानी निशांत खनी, माई सिटी रिपोर्टर, हरिद्वार
निशांत खनी, माई सिटी रिपोर्टर, हरिद्वार Published by: रेनू सकलानी Updated Wed, 16 Nov 2022 08:55 AM IST
सार

ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का शंकराचार्य बनने पर विरोध थमा नहीं है। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य की गद्दी गुरु के बाद शिष्य संभालते हैं। यही मठों की परंपरा है। गुरु के कृपापात्र शिष्य एक से अधिक होने पर उनके बीच शास्त्रार्थ हो सकता है। वह भी मठ का अपना विधान है। इसमें अखाड़ों या परिषद का कोई दखल नहीं है।

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Swami Avimukteshwaranand Saraswati Statement Protest to becoming Shankaracharya Haridwar uttarakhand news
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उनके शंकराचार्य बनने पर विरोध करने के पीछे एक लॉबी विशेष का हाथ बताया। कहा कि कुछ स्वार्थी संत लॉबी के हाथों की कठपुतली बने हुए हैं जबकि पूरा संत समाज उनके साथ है।

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शंकराचार्य बनने के बाद पहली बार हरिद्वार कनखल स्थित शंकराचार्य मठ पहुंचे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मंगलवार को अमर उजाला से खास बातचीत की। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि एक लॉबी शंकराचार्य की गद्दी पर कब्जा करना चाहती है। संत समाज का उनको समर्थन है लेकिन कुछ स्वार्थी संत लॉबी के इशारे पर भ्रम फैला रहे हैं।
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शंकराचार्य परिषद अध्यक्ष आनंद स्वरूप का जिक्र करते हुए कहा कि वह कौन हैं शंकराचार्य के लिए संतों का शास्त्रार्थ करवाने वाले? शंकराचार्य की गद्दी गुरु के बाद शिष्य संभालते हैं। यही मठों की परंपरा है। गुरु के कृपापात्र शिष्य एक से अधिक होने पर उनके बीच शास्त्रार्थ हो सकता है। वह भी मठ का अपना विधान है। इसमें अखाड़ों या परिषद का कोई दखल नहीं है।
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17 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में पट्टाभिषेक मामले की होने वाली सुनवाई के सवाल पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि कोर्ट दलील नहीं प्रमाणों के आधार पर फैसला सुनाता है। कोर्ट में उनके अधिवक्ता की ओर से शंकराचार्य परंपरा से जुड़े प्रमाण प्रस्तुत कर दिए हैं।

21 नवंबर के बाद धर्म सेंसर बोर्ड गठन की कवायद
 

वाराणसी में 2015 में हुए मुकदमे में उनके खिलाफ जारी एनबीडब्ल्यू के सवाल पर कहा कि उनके अधिवक्ता की ओर से न्यायालय को जानकारी दे दी गई है। धर्म की रक्षा की लड़ाई में उनके खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया। धर्म के लिए जेल जाना पड़े तो जाएंगे पीछे नहीं हटेंगे, तब भी नहीं हटे थे। 

शंकराचार्य ने कहा कि हिंदी फिल्में, धारावाहिक और वेब सीरिज बनाने वाले विशेष समुदाय के निर्देशक और निर्माता हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करते हैं। इससे सनातनी आहत होते हैं। इसको रोकने के लिए 21 नवंबर के बाद धर्म सेंसर बोर्ड गठन की कवायद की जाएगी।

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बोर्ड में सनातनी विद्वान शामिल होंगे। वह समीक्षा करेंगे और रिपोर्ट देंगे। इसके देवी-देवताओं के अपमान वाली फिल्मों और धारावाहिक पर रोक लगाने के लिए सरकार से सिफारिश की जाएगी। अपने अनुयायियों से उसे देखने के लिए बहिष्कार करने की अपील की जाएगी।

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