सुषमा स्वराज नहीं करना चाहती PM मोदी का गुणगान!
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केंद्र सत्तासीन हुए बीजेपी को एक साल पूरा हो गया। केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज भाजपा के अन्य नेताओं की राह पर नहीं चली।
गुरुवार को वह देहरादून में थीं और उन्होंने नरेंद्र मोदी का यशगान करने से परहेज किया और केंद्र सरकार को सामूहिक उत्तरदायित्व के चश्मे से देखा। विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में जब भी एक दो बार जिक्र किया तो केवल प्रधानमंत्री कहा।
दून में बन्नू स्कूल के मैदान पर जनसभा में उन्होंने 17 साल बाद नेपाल जाने वाले प्रधानमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी का नाम जरूर लिया। केंद्र में सत्तासीन हुए भाजपा को एक साल बीत गया। इस अवसर पर चल रहे जनकल्याण पर्व पर केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पहले एक होटल में मीडिया से बात की और फिर रेसकोर्स में जनसभा को संबोधित किया।
पिछले सप्ताह केंद्रीय शहरी विकास मंत्री एम वैंकेया नायडू भी देहरादून आए थे। उन्होंने नरेंद्र मोदी का नाम इतनी बार लिया कि गिनना मुश्किल हो गया। और पूरा श्रेय नरेंद्र मोदी को दिया।
पहले कई नेता कर चुके हैं PM मोदी का गुणगान
इससे पहले भी स्वास्थ्य एवं पर्यटन मंत्री महेश शर्मा ने भी यही किया। लेकिन आज केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इस परिपाटी से मुकम्मल तौर पर परहेज किया। उन्होंने मीडिया से बातचीत में भी और जनसभा में भी ना तो नरेंद्र मोदी का यशगान किया और ना ही एक साल की उपलब्धि का श्रेय मोदी को दिया।
दो तीन मर्तबा जब देश के नेतृत्व की बात आई तो उन्होंने केवल प्रधानमंत्री शब्द को प्रयोग किया। इसके अलावा उन्होंने 17 साल बाद नेपाल जाने वाले प्रधानमंत्री के रूप में एक बार नरेंद्र मोदी का नाम लिया और कहा कि साल भर में विदेशों में भारत की साख बढ़ने से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अग्रणी नेताओं की पंक्ति में शुमार कर दिया है।
यह पहली बार देखा गया कि किसी केंद्रीय मंत्री ने नरेंद्र मोदी का गुणगान करने के बजाय केंद्र की सरकार को सार्वजनिकता के तराजू में तौला। विदेश नीति की बात पर सुषमा ने कहा कि विश्व में 193 देश है और पिछले एक साल में 102 देशों के साथ भारत का पर्याप्त संपर्क हुआ है।
पाकिस्तान के लिए तीन सिद्धांत अपनाए गए। सभी हल शांतिपूर्ण तरीके से होंगे। वार्ता केवल भारत-पाक के बीच होगा, कोई तीसरा नहीं होगा। और वार्ता तभी होगी जब गोलीबारी थमेगी। चीन को भी बताया कि तनाव पैदा करने में कोई फायदा नहीं है। भारत और चीन का साथ चलना एशिया के हक में है।