सरोगेसी धोखाधड़ी मामला: 5 साल बाद मिला बेटा, मां बोली अमर उजाला को सलाम, मेरे मातृत्व का किया सम्मान
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सरोगेसी के मामले में जुड़वा बच्चों में से एक बच्चा छुपाकर धोखाधड़ी करने के मामले का दून पुलिस ने सोमवार को खुलासा कर दिया। इस मामले में पुलिस ने चार साल बाद छुपाया गया बच्चा बरामद कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। मामले का खुलासा सोमवार को एसपी देहात प्रमेंद्र सिंह डोबाल, सीओ वीरेंद्र सिंह रावत, कोतवाल रीतेश साह की मौजूदगी में किया गया।
पुलिस के अनुसार एक दंपति ने जुलाई 2014 में एक सरोगेट मदर से संपर्क किया था। दंपति ने सरोगेसी से संतान की प्राप्ति के लिए सरोगेट मदर को तीन लाख रुपये अदा किए थे। उसका पूरा इलाज मेरठ के एक निजी अस्पताल में कराया गया।
दंपति ने सरोगेट मदर से शपथपत्र भी लिखवाया था कि जो भी संतान होगी वह उन्हें मिलेगी। भ्रूण प्रत्यारोपित होने के करीब तीन माह बाद गर्भ में दो बच्चे होने की जानकारी मिली। मेरठ के ही एक निजी अस्पताल में महिला (सरोगेट मदर) ने जुड़वा बेटों को जन्म दिया, लेकिन सरोगेट मां ने एक बच्चे को जीवित तथा दूसरे को मृत बता दिया और जीवित बच्चा दंपति को दे दिया गया।
बाद में दंपति को जानकारी मिली कि उनका दूसरा बच्चा भी जीवित है, जिसे सरोगेट मदर ने छिपा लिया है। इस पर दंपति ने दूसरा बच्चा पाने के लिए सरोगेट मदर से संपर्क किया और अतिरिक्त धनराशि देने की भी बात कही, लेकिन सरोगेट मदर ने दूसरे बच्चे की जानकारी नहीं दी।
इसके बाद वर्ष 2018 में दंपति ने आरोपी महिला (सरोगेट मदर) के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज करा दिया। विवेचना में पुलिस के सामने आया कि सरोगेट मदर ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था और दोनों ही जीवित हैं, लेकिन एक बच्चा छिपाकर सरोगेट मदर ने अपने रिश्तेदार को दे दिया। इसके बाद आरोपी सरोगेट मदर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था।
इसके बाद से प्रभारी निरीक्षक कोतवाली ऋषिकेश के नेतृत्व में पुलिस टीम बच्चे और आरोपी रिश्तेदार की तलाश कर रही थी। एसपी देहात प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने बताया कि रविवार रात आरोपी रिश्तेदार को बच्चे के साथ मेरठ से गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी को मंगलवार को न्यायालय में पेश किया जाएगा। बच्चे को फिलहाल दंपति के सुपुर्द किया गया है। कोर्ट के आदेश के बाद बच्चे की स्थाई तौर पर सुपुर्दगी की जाएगी।
अमर उजाला को सलाम, जिसने मेरे मातृत्व का सम्मान किया। अमर उजाला सही में सच के साथ खड़ा है। चार साल बाद अपने जिगर के टुकड़े को पाकर अभिूभत हुई मां ने इसी अंदाज में अमर उजाला का आभार जताया। 2017 में एक बार तो पुलिस ने उनकी बात को झुठला कर मामला थाने से ही निपटा दिया था। लेकिन महिला ने हिम्मत नहीं हारी, लंबी लड़ाई जरूर लड़नी पड़ी, लेकिन नतीजा बेहद सुखद रहा।
पीड़ित महिला के मुताबिक शादी के कई वर्ष बाद तक संतान की प्राप्ति नहीं हुई तो 2014 में सरोगेसी से बच्चा करने का फैसला लिया। स्टांप पर हुए अनुबंध के आधार पर मेरठ के टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर की मदद से महिला के गर्भ में भ्रूण प्रत्यारोपित कराया गया।
गर्भधारण से लेकर डिलीवरी तक के खर्च के अलावा महिला द्वारा इसके बदले ढाई लाख की रकम वसूली गई। पीड़ित महिला का कहना है कि डिलीवरी के दौरान जुड़वा बच्चों में से एक को मृत बताकर छिपा लिया।
उस समय महिला की बात पर भरोसा कर लिया था, लेकिन 2015 में मेरठ में सरोगेसी मां के साथ एक बालक को देखकर मां का माथा ठनक गया था, क्योंकि उसका हुलिया उनके बेटे से काफी मिलता-जुलता था।
पीड़ित मां ने बताया कि दूसरे बच्चे के जिंदा होने का दावा किया तो महिला बच्चे समेत गायब हो गई। 2017 में पहली बार ऋषिकेश कोतवाली में लिखित शिकायत की। पुलिस सरोगेसी से जुड़े एक शख्स को मेरठ से उठाकर कोतवाली ले आई। पुलिस ने उनकी बात को झुठलाते हुए मामला थाने से निपटा दिया। उस समय पुलिस से बहुत निराशा हुई थी। अमर उजाला ने उनकी बिना शिकायत के ऋषिकेश पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाकर उनके हौसलों को बढ़ाने का काम किया।
एसएसपी की एसटीएफ रिधिम अग्रवाल ने खबर का संज्ञान लेकर उनके दर्द को सुना और सरोगेसी मां को पश्चिम बंगाल से ढूंढ निकाला। फिर भी बालक नहीं मिला। ऋषिकेश कोतवाली निरीक्षक रितेश शाह ने टीम के साथ कई माह के प्रयासों के बाद लाड़ले को ढूंढ निकाला। पुलिस और अमर उजाला को सलाम। उम्मीद जताई कि आगे भी वे इसी तरह सच के साथ खड़े रहेंगे।