काला धन वापस लाने और मंत्रियों के भ्रष्टाचार मामलों में पीएमओ को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
- आईएफएस संजीव चतुर्वेदी को आरटीआई आवेदन पर 2017 से नहीं मिला जवाब
- पीएमओ ने काले धन की जांच प्रभावित होने की आशंका जताकर नहीं दी जानकारी
- मंत्रियों के भ्रष्टाचार के मामले में कहा था कि सूचना बहुत अधिक, इतने संसाधन नहीं
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सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत विदेश से काला धन वापस लाने और केंद्रीय मंत्रियों के भ्रष्टाचार मामलों को लेकर मांगी गई सूचना से संबंधित आईएफएस संजीव चतुर्वेदी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री कार्यालय को नोटिस जारी किया है।
शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस नागेश्वर राव और जस्टिस हेमंत गुप्ता की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। संजीव ने अगस्त 2017 में पीएमओ से सूचना के अधिकार के तहत यह जानकारी मांगी थी। इस आवेदन में संजीव ने प्रधानमंत्री कार्यालय से विदेशों में जमा काले धन को वापस लाने के लिए हो रही कोशिश, कितना धन लोगों के बैंक खातों में जमा कराया गया से संबंधित जानकारी मांगी गई थी।
इसके साथ ही आरटीआई में यह भी पूछा गया था कि प्रधानमंत्री कार्यालय को कितने केंद्रीय मंत्रियों के भ्रष्टाचार में लिप्त होने की शिकायत मिली। इन शिकायतों के आधार पर कितने मंत्रियों के खिलाफ क्या कार्यवाही की गई।
चार हफ्ते में जवाब देने को कहा
पीएमओ ने सूचना स्पष्ट न होने के आधार पर इस आवेदन को खारिज किया था। इसके बाद पीएमओ ने यह कहते हुए सूचना नहीं दी कि इससे काले धन की जांच प्रभावित होगी और मंत्रियों के मामले में सूचना इतनी अधिक है कि इसे जुटाने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं है। इसके बाद केंद्रीय सूचना आयोग, दिल्ली हाईकोर्ट की एकल खंडपीठ में यह मामला पहुंचा।
हाईकोर्ट ने भी इस याचिका को खारिज किया था। हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए संजीव ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। संजीव का कहना था कि हर नागरिक को यह जानने का हक है कि जनप्रतिनिधियों के भ्रष्टाचार के क्या-क्या मामले हैं।
संजीव की इस याचिका को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री कार्यालय और केंद्रीय सूचना आयोग को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब देने को कहा है। संजीव के अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने इसके बाद ट्वीट किया कि काला धन और मंत्रियों के भ्रष्टाचार के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पीएमओ को नोटिस जारी किया है।