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इस गांव के लिए 'मसीहा' बनी यह महिला
बिशन सिंह बोरा/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 10 Oct 2013 10:44 AM IST
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राजधानी देहरादून में रायपुर मेन मार्ग से तीन किलोमीटर की दूर सुंदरवाला गांव का लगभग आधा हिस्सा पहाड़ी पर है।
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ऊंचाई पर होने से लगभग सात हजार की आबादी वाले इस गांव में पानी पहुंचाना बड़ी समस्या थी। गर्मियों में तो लोग पानी के बिना तड़प उठते थे। गांव के नालापानी क्षेत्र के कुछ घरों में पानी आता था वह भी मुश्किल से पंद्रह-बीस मिनट।
पानी की बर्बादी को रोकने का संकल्प
सुनीता को जब ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान की बागडोर सौंपी तो सबसे पहले उसने पानी की बर्बादी को रोकने का संकल्प लिया। जलस्रोत के बर्बाद होते पानी को सुनीता ने पांच हजार लीटर की टंकी बनवाकर उसमें संरक्षित कराया।
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वहीं हर्चावाला में सरकार का मुंह ताके बगैर खुद के प्रयास से पेयजल लाइन बिछवाई। जिससे क्षेत्र के 250 परिवारों का जलसंकट दूर हो गया।
सूझबूझ से खुलवाया मार्ग
गांव में ही कई दशकों से मार्ग न होने से लोगों को पगड्डी से होकर जाना पड़ता था। बीमार लोगों को खासी परेशानी होती थी। कुछ जनप्रतिनिधियों ने मार्ग खुलवाने का प्रयास किया, लेकिन कुछ लोग इसके लिए तैयार नहीं थे।
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सुनीता ने लोगों को समझाया तो मार्ग खुला। अब इस मार्ग से अब चार पहिया वाहन निकल सकते हैं।
दाह संस्कार में भी करती हैं मदद
गांव में कुछ ऐसे परिवार भी हैं, जो आर्थिक रूप से बेहद कमजोर हैं, परिवार से किसी के गुजरने पर वह दाहसंस्कार तक का खर्च ठाने में सक्षम नहीं हैं। सुनीता ने ऐसे कई लोगों की मदद की है।
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