अंतरिक्ष में होगी अनोखी घटना, क्षण भर को ठहर जाएगा सूरज
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वर्ष 2016 की प्रथम संक्रांति (साल्सटिस) पर 21 जून को प्रकृति के तमाम अजूबे देखने को मिलेंगे। जहां उत्तरी गोलार्ध में 14 घंटे से ज्यादा का दिन होगा, वहीं आर्कटिक क्षेत्र में सूर्य 24 घंटे नजर आएगा। जबकि अंटार्कटिका में 24 घंटे की रात होगी। इस दौरान एक पल ऐसा भी आएगा जब सूर्य देवता का रथ क्षण भर को ठहर जाएगा।
इस वर्ष साल्सटिस का समय उत्तरी गोलार्ध में भारतीय समयानुसार सुबह चार बजकर चार मिनट पर पड़ेगा। इस समय सूर्य कर्क रेखा के ठीक ऊपर होगा। यहीं से उसका दक्षिण की ओर वापसी का सफर शुरू होगा। उत्तर की ओर बढ़ने से दक्षिण को वापसी के दौरान सूर्य क्षणांश को ठहर जाएगा। दरअसल साल्सटिस लैटिन भाषा का शब्द है जो सौल और सिस्टियर से बना है। सौल अर्थात सूर्य, सिस्टियर अर्थात ठहर जाना यानी सूर्य का ठहर जाना।
अंतरिक्ष में पृथ्वी के 23.5 डिग्री झुके होने की विशेष स्थिति और सूर्य से दूरी के योग से जहां इन दिनों आर्कटिक क्षेत्र में 24 घंटे दिन रहता है और मिडनाइट सन की घटना होती है।
21 जून हालांकि साल का सबसे बड़ा दिन
अंटार्कटिक में इस अवधि में 24 घंटे रात रहती है। उत्तरी गोलार्ध में 21 जून हालांकि साल का सबसे बड़ा दिन अवश्य होता है, लेकिन इस रोज पृथ्वी सूर्य से निकट न होकर सर्वाधिक दूर होती है।
आर्यभट्ट शोध एवं प्रेक्षण विज्ञान संस्थान एरीज के वैज्ञानिक डा. वहाबुद्दीन के अनुसार पृथ्वी पर सर्दी गर्मी का संबंध केवल सूर्य से दूरी से न होकर उसके 23.5 डिग्री के झुकाव से भी है। यह भी एक खास बात है कि सबसे बड़ा दिन वर्ष का सबसे गर्म दिन नहीं होता, बल्कि सर्वाधिक गर्म दिन इसके कुछ दिन बाद पड़ता है, जो इन दिनों पृथ्वी व सागर के गर्म होते जाने से घटित होता है।
एक विशेषता यह भी है कि सबसे पहले सूर्योदय या सबसे देर में सूर्यास्त भी 21 जून को न होकर इसके चंद सप्ताह पहले और बाद में पड़ता है। ग्रीष्म कालीन संक्रांति 20, 21 या 22 जून को भी पड़ सकती है। हालांकि 22 जून को यह संक्रांति दुर्लभ ही होती है। इससे पहले 1975 में यह संयोग पड़ा था जो अब 2203 में ही घटित होगा।
Published By : Nirmala Suyal