विधानसभा में बैठ पिता ने देखा था बेटे को IAS बनाने का सपना
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पिता जब विधानसभा सचिवालय में बतौर अनुसचिव अपनी सेवाएं दे रहे थे तो हर दिन आईएएस, पीसीएस अफसरों से वास्ता पड़ता था। अफसरों के इसी आकर्षण के तहत वह अपने बड़े बेटे आदित्य को भी प्रेरणा देते।
पाई 308वीं रैंक
उनकी यही प्रेरणा शनिवार को सिविल सेवा परीक्षा का परिणाम आते ही हकीकत में बदल गई। बुद्धि बल्लभ मंमगाई का बेटा सिविल सेवा परीक्षा में 308वीं रैंक से पास हो गया। अब उन्हें आईपीएस (इंडियन पुलिस सर्विस) या आईआरएस (इंडियन रेवेन्यू सर्विस) में सेवा करने का मौका मिल सकता है।
नकरौंदा के अलकनंदा विहार निवासी मंमगाई परिवार के लिए शनिवार का दिन खुशियों की सौगात लेकर आया। बेटे आदित्य मंमगाई ने परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की। आदित्य ने बताया कि उन्होंने चौथे प्रयास में यह सफलता हासिल की है। इससे पहले दो प्रयासों में वह प्री भी पास नहीं कर पाए थे, जबकि तीसरे प्रयास में प्री पास करने के बाद मुख्य परीक्षा से बाहर हो गए थे।
पापा की प्रेरणा ने असफलता के बाद बनाए रखा हौसला
आदित्य ने बताया कि पापा हमेशा उन्हें सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होने के लिए प्रेरित करते थे। इसलिए जब उन्हें असफलता भी मिली तो वह निराश नहीं हुए और जुटे रहे। उनकी इस कामयाबी पर माता अनीता मंमगाई, पत्नी पूजा मंमगाई, छोटे भाई सुनील और गौरव भी बेहद खुश हैं।
आदित्य के पिता बुद्धि बल्लभ ने कहा कि उनका पूरा कॅरियर आईएएस, पीसीएस अफसरों के बीच बीता है। उनकी भी ख्वाहिश थी कि एक दिन उनका बेटा आईएएस या पीसीएस अफसर बने।
आदित्य के शिक्षक सुशील कुमार ने बताया कि वह परीक्षा की तैयारी को लेकर हमेशा बेहद गंभीर रहते थे। सुबह से शाम 5:30 बजे तक आईआरडीई में नौकरी करने के बाद वह शाम को छह बजे से उनके पास तैयारी के लिए आते थे और यहां से आठ बजे के बाद घर जाते थे।
कामयाबी का इतिहास
आदित्य ने वर्ष 2000 में गुरुनानक इंटर कॉलेज से 10वीं और 2002 में यहीं से 12वीं पास की। इसके बाद उन्होंने डीबीएस पीजी कॉलेज से 77 प्रतिशत अंकों के साथ बीएससी पीसीएम किया। यहीं से एमएससी फिजिक्स की पढ़ाई शुरू कर दी।
इस बीच कोर्स पूरा होने से पहले ही उन्हें डीआरडीओ के संस्थान आईआरडीई में बतौर साइंटिफिक असिस्टेंट काम करने का मौका मिला। उन्होंने ज्वाइन कर लिया। एमएससी पूरी होने के बाद उन्होंने फिर परीक्षा दी, जिसके बाद वह आईआरडीई में वैज्ञानिक बन गए। इन दिनों वह बतौर वैज्ञानिक सेवा दे रहे हैं।
बिटिया लेकर आई किस्मत की चाबी
कामयाबी के इस मौके पर चार महीने की मासूम आरोही मंमगाई को भले कुछ समझ न आ रहा हो, लेकिन मंमगाई परिवार के लिए यह बेटी बेहद भाग्यशाली साबित हुई। पिता आदित्य मंमगाई ने बताया कि जब बेटी का जन्म हुआ तो कई लोगों ने कहा था कि अब किस्मत बदल जाएगी। आज जब सिविल सेवा परीक्षा में सफलता मिली है तो वाकई यह बात सच साबित हो गई। उनकी बेटी उनके लिए लकी चार्म बन गई।
ऐसे पाएं कामयाबी
- सिविल सेवा का सिलेबस बहुत बड़ा है। इसमें सही मार्गदर्शन और निरंतर अध्ययन बेहद जरूरी है।
- दून में गुणवत्तापरक कोचिंग की कमी के चलते कई बार दिल्ली में टेस्ट सीरीज भी फायदेमंद हो सकती है।
- करेंट अफेयर्स पर सबसे ज्यादा फोकस रखने की जरूरत है। अखबारों से हमें न केवल नॉलेज मिलती है, बल्कि कई समस्याओं का हल निकालने की जानकारी भी मिलती है।
- जब और जितना मन हो, उतनी तैयारी करें। ज्यादा झंझट या बोझ बनाकर तैयारी न करें।
खलता है गांव का विकास न होना...
मूलरूप से चमोली के नंदप्रयाग के सकंड गांव निवासी आदित्य का कहना है कि वह जब भी गांव जाते हैं तो वहां का विकास न होना खलता है। एक समय था जब गांव में करीब 200 परिवार रहते थे, आज रोजी रोटी के लिए सब पलायन कर गए हैं। अब बमुश्किल 50 लोग रहते हैं। उनके चचेरे भाई बहन आज भी पैदल ही स्कूल जाते हैं, वहां सड़क नहीं है। गांव और प्रदेश की यह हालत उन्हें हमेशा सिविल सेवा में जाने के लिए प्रेरित करती थी।