फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Students and teacher fainted in class

ये क्या, छात्राओं के साथ शिक्षक क्लास में हुए बेहोश

Sun, 28 Aug 2016 10:41 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
ब्यूरो / अमर उजाला, रुद्रप्रयाग Updated Sun, 28 Aug 2016 10:41 AM IST
विज्ञापन
Students and teacher fainted in class
fainted - फोटो : demo pic

रुद्रप्रयाग की ऊखीमठ तहसील के राजकीय इंटर कालेज परकंडी में छह छात्राओं की तबियत फिर बिगड़ गई। इस दौरान एक शिक्षक भी कुछ देर के लिए बेहोश हो गए। प्रधानाचार्य की सूचना पर स्कूल पहुंचे अभिभावक पीड़ित पाल्यों को अपने साथ घर ले गए। विगत 22 अगस्त को भी यहां 15 छात्राएं बेहोश हो गईं थी।

विज्ञापन


शनिवार को स्कूल शुरू होने के करीब दो घंटे बाद कुछ छात्राओं की तबियत अचानक बिगड़ गई। कक्षा नौ में दो छात्राएं जोर-जोर से चिल्लाने लगी। जब तक शिक्षक कुछ समय पाते, कक्षा 11 और 12वीं में भी छात्राएं चिल्लाने के साथ रोते हुए बेहोश हो गई। इसी दौरान 12वीं कक्षा में समाजशास्त्र पढ़ा रहे शिक्षक आलोक श्रीवास्तव भी जोर से चिल्लाते हुए बेहोश हो गए। यह देख पूरा विद्यालय स्टाफ सकते में आ गया।
विज्ञापन


अन्य कक्षाओं में पढ़ रहे छात्र-छात्राएं भी भय से बाहर आ गए। करीब आधा घंटे बाद शिक्षक की स्थिति सामान्य हो पाई। दूसरी तरफ प्रधानाचार्य की सूचना पर कई अभिभावक विद्यालय पहुंचे। सभी पीड़ित छात्राओं को स्कूल की अन्य बालिकाओं के साथ घर भेज दिया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


प्रधानाचार्य एससी मलासी ने बताया कि बीते 22 अगस्त के बाद शनिवार को भी ऐसी घटना होने से जूनियर कक्षाओं के बच्चे डर रहे हैं। पठन-पाठन भी प्रभावित हो रहा है। संबंधित अभिभावकों को कहा गया है कि जब तक बच्चे स्वस्थ नहीं होते, उन्हें घर पर ही रखें।

पूर्व में भी स्कूलों में हो चुकी ये घटनाएं
चमोली, पिथौरागढ़ और नैनीताल सहित पौड़ी और टिहरी जनपद के कई विद्यालयों में छात्र-छात्राओं के रोने, चिल्लाने और बेहोश होने की घटनाएं पूर्व में हो चुकी हैं। वर्ष 2014 मार्च-अप्रैल में कर्णप्रयाग के जीआईसी नैणी में एक सप्ताह तक छात्राओं के रोने, चिल्लाने और बेहोश होती रही। काउंसिलिंग के बाद स्थिति सामान्य हुई थी।


क्या कहते हैं डाक्टर
ये सोशल या ग्रुप हिस्टीरिया के लक्षण हैं। इसमें किसी एक के रोने या चिल्लाने पर दूसरा, फिर तीसरा, चौथा, पांचवा व्यक्ति भी रोने चिल्लाने लगता है। कुछ समय तक लगातार काउंसिलिंग और हेल्थ चेकअप से पीड़ित को इस समस्या से निजात दिलाई जाती है। जरूरी यह है कि पीड़ित को सकारात्मक सोच के लिए प्रेरित किया जाए।
- डा. ओपी आर्य, डिप्टी सीएमओ, रुद्रप्रयाग

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed