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इन छात्रों के लिए मुश्किल होगा कैट क्वालिफाई करना, परीक्षा विशेषज्ञों ने बताई चुनौतियां
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 27 Nov 2017 01:58 PM IST
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परीक्षा
देश के प्रबंधन संस्थानों में दाखिले की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षा कॉमन एडमिशन टेस्ट (कैट) में इस साल एलआरडीआई ने अभ्यर्थियों को मुश्किल में डाल दिया।
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लॉजिकल रीजनिंग और डाटा इंटरप्रिटेशन (एलआरडीआई) के सवालों ने इतना परेशान किया कि कोई भी अभ्यर्थी सारे सवाल हल नहीं कर पाया। परीक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि जिन छात्रों ने एलआरडीआई के 12 से 15 सवाल भी हल कर दिए होंगे, उनके लिए कैट क्वालिफाई करना काफी आसान हो जाएगा।
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रविवार को राजधानी में उत्तरांचल यूनिवर्सिटी, तुलाज इंस्टीट्यूट, माया इंस्टीट्यूट और टीसीएसआईओएनएस सेंटर में कैट परीक्षा सुबह दस बजे शुरू हुई। परीक्षा दो पालियों में हुई। पहली पाली सुबह दस से दोपहर एक बजे तक और दूसरी पाली दोपहर तीन से शाम छह बजे तक चली।
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परीक्षा के लिए चार केंद्रों पर 2365 अभ्यर्थी पंजीकृत थे, जिनमें से 2083 ने कैट का एग्जाम दिया। परीक्षा में अच्छी बात यह रही कि वर्ष 2015 से शुरू हुआ आसान गणित का सिलसिला इस बार भी जारी रहा।
लगातार तीसरे साल गणित के सवाल सबसे आसान रहे, जिससे काफी हद तक इस बार कैट क्वालिफाई करने वालों में इंजीनियरों के बजाय दूसरी ब्रांच के छात्र भी सामने आएंगे। परीक्षा विशेषज्ञ एवं कॅरियर लांचर के निदेशक अमित मित्तल ने बताया कि प्रश्न पत्र तीन भागों में बंटा था।
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एलआरडीआई के सवाल पहली बार सबसे ज्यादा मुश्किल
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पहले भाग में वर्बल एबिलिटी और रीडिंग कांप्रिहेंसन के 34 सवाल पूछे गए। दूसरे भाग में डाटा इंटरप्रिटेशन और लॉजिकल रीजनिंग (एलआरडीआई) के 32 सवाल पूछे गए। तीसरे भाग में क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड के 34 प्रश्न पूछे गए। उन्होंने बताया कि एलआरडीआई के सवाल पहली बार सबसे ज्यादा मुश्किल थे। कोई भी अभ्यर्थी इन्हें पूरा हल नहीं कर पाया।
प्रश्नपत्र के हर भाग को हल करने के लिए अभ्यर्थियों को 60-60 मिनट का समय दिया गया था, लेकिन एलआरडीआई के भाग में ही अभ्यर्थी उलझे रह गए। एलआरडीआई के पांच सेट थे। इनमें से जिस अभ्यर्थी ने दो सेट भी हल किए होंगे, समझो वह कैट में अच्छा स्कोर करेगा।
वहीं, परीक्षा विशेषज्ञ एवं टाइम इंस्टीट्यूट के निदेशक राजीव कुकरेजा का कहना है कि एलआरडीआई की वजह से स्टूडेंट्स को परेशानी जरूर हुई, लेकिन इस बार कैट की कटऑफ 160 के आसपास रह सकती है। यानी इतने अंकों पर 95 या इससे ऊपर परसेंटाइल आ सकती है।
परीक्षा देने वाले छात्र आकाश रावत ने बताया कि मैथ तो आसान था, लेकिन एलआरडीआई सबसे मुश्किल थी। निकिता का कहना है कि इस बार अंग्रेजी भी अपेक्षाकृत आसान थी, लेकिन लॉजिकल रीजनिंग ही सबसे मुश्किल रही।
सर्दी में नंगे पांव दिया एग्जाम
अमूमन सामान्य परीक्षाओं में मोबाइल फोन, ईयर फोन, माइक्रोफोन और घड़ी ले जाने की सख्त की मनाही रहती है, लेकिन कैट परीक्षा में जूते पहनकर जाने की मनाही थी। लिहाजा जो छात्र चप्पल पहनकर आए थे, उन्हें परेशानी नहीं हुई। लेकिन जूते पहनने वाले अभ्यर्थियों को नंगे पांव कमरे में जाना पड़ा।
प्रश्नपत्र के हर भाग को हल करने के लिए अभ्यर्थियों को 60-60 मिनट का समय दिया गया था, लेकिन एलआरडीआई के भाग में ही अभ्यर्थी उलझे रह गए। एलआरडीआई के पांच सेट थे। इनमें से जिस अभ्यर्थी ने दो सेट भी हल किए होंगे, समझो वह कैट में अच्छा स्कोर करेगा।
वहीं, परीक्षा विशेषज्ञ एवं टाइम इंस्टीट्यूट के निदेशक राजीव कुकरेजा का कहना है कि एलआरडीआई की वजह से स्टूडेंट्स को परेशानी जरूर हुई, लेकिन इस बार कैट की कटऑफ 160 के आसपास रह सकती है। यानी इतने अंकों पर 95 या इससे ऊपर परसेंटाइल आ सकती है।
परीक्षा देने वाले छात्र आकाश रावत ने बताया कि मैथ तो आसान था, लेकिन एलआरडीआई सबसे मुश्किल थी। निकिता का कहना है कि इस बार अंग्रेजी भी अपेक्षाकृत आसान थी, लेकिन लॉजिकल रीजनिंग ही सबसे मुश्किल रही।
सर्दी में नंगे पांव दिया एग्जाम
अमूमन सामान्य परीक्षाओं में मोबाइल फोन, ईयर फोन, माइक्रोफोन और घड़ी ले जाने की सख्त की मनाही रहती है, लेकिन कैट परीक्षा में जूते पहनकर जाने की मनाही थी। लिहाजा जो छात्र चप्पल पहनकर आए थे, उन्हें परेशानी नहीं हुई। लेकिन जूते पहनने वाले अभ्यर्थियों को नंगे पांव कमरे में जाना पड़ा।
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