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छत्तीसगढ़: नक्सल मुक्त क्षेत्र में नवोदय का सपना, सुपर 30 की तर्ज पर बच्चों को मिल रही मुफ्त कोचिंग

Sun, 06 Sep 2026 10:31 AM IST
शाहीन परवीन एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: शाहीन परवीन Updated Sun, 06 Sep 2026 10:31 AM IST
सार

छत्तीसगढ़ के नक्सल मुक्त क्षेत्र में नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा को लेकर बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। बच्चों के सपनों को उड़ान देने के लिए शिक्षक सुपर 30 की तर्ज पर उन्हें मुफ्त कोचिंग देकर परीक्षा की तैयारी करा रहे हैं।

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Teachers Offer Free Coaching for Navodaya Exam in Chhattisgarh's Naxal-Free Region
छत्तीसगढ़ में नवोदय का जुनून - फोटो : AI

विस्तार

कभी नक्सल हिंसा और खौफ के साए में जीने वाले बस्तर संभाग के बीजापुर जिले में अब शिक्षा की नई इबारत लिखी जा रही है। ऋतिक रोशन अभिनीत चर्चित फिल्म सुपर 30 से प्रेरित होकर यहां के समर्पित सरकारी शिक्षकों ने वंचित वर्ग के बच्चों के लिए सुबह-सुबह मुफ्त कोचिंग की अनूठी पहल शुरू की है। स्कूल की घंटी बजने से घंटों पहले छह अलग-अलग प्राथमिक स्कूलों के 50 से अधिक बच्चे नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए एक साधारण से केंद्र में जुटने लगे हैं।

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स्थानीय शिक्षक प्रीतम कुमार बैगा, गजेंद्र प्रधान और प्रधान पाठक गजेंद्र यादव पिछले दो वर्षों से अपनी नियमित ड्यूटी शुरू होने से पहले इन बच्चों को तराशने में जुटे हैं। इस वर्ष आसपास के छह स्कूलों से करीब 53 बच्चे सुबह की इस विशेष कक्षा में पहुंच रहे हैं। धनौरा के क्लस्टर समन्वयक सत्यजीत राणा बताते हैं कि बच्चों में पढ़ाई के प्रति गजब का उत्साह देखकर शिक्षकों ने खुद से यह पहल शुरू की थी।
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सहायक शिक्षक गजेंद्र प्रधान के अनुसार, इलाके के बच्चों में नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा को लेकर जबरदस्त क्रेज है। सीमित संसाधनों और दुर्गम पृष्ठभूमि के बावजूद बच्चों की लगन को देखते हुए शिक्षकों ने बिना किसी शुल्क के उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने का बीड़ा उठाया। एजेंसी

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अभावों के बीच बड़े सपने बुन रहे विद्यार्थी

कक्षा पांचवीं के छात्र अब बंदूक के डर के बजाय कलम के दम पर अपना भविष्य संवारने का सपना देख रहे हैं। एक छात्रा ने उत्साह से कहा, मैं यहां नवोदय परीक्षा की तैयारी कर रही हूं, खूब पढ़कर आगे चलकर एक शिक्षिका बनना चाहती हूं। शिक्षकों के इस दो साल के अनौपचारिक प्रयास का असर भी दिखने लगा है। दूरदराज और पिछड़े गांवों के कई बच्चे पहले ही प्रतिष्ठित नवोदय विद्यालयों में दाखिला हासिल करने में सफल रहे हैं। दशकों तक संघर्ष और सीमित अवसरों की पहचान झेलने वाले बीजापुर में शिक्षकों की यह छोटी सी पहल बच्चों के बड़े सपनों को नई उड़ान दे रही है।

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