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इस तुगलकी फरमान ने उत्तराखंड में फैलाई 'अराजकता'

Mon, 06 Jan 2014 10:04 AM IST
अजित सिंह राठी/अमर उजाला, देहरादून
अजित सिंह राठी/अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 06 Jan 2014 10:04 AM IST
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strike of taxi and maxi cab

पिछले छह सालों से सोयी उत्तराखंड सरकार अचानक जागी और पहाड़ में टैक्सी व मैक्सी कैब चलाने वालों के लिए तुगलकी फरमान जारी कर दिया।

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टकटकी लगाए इंतजार
इस फरमान का असर यह हुआ कि पिछले पांच दिन से पहाड़ में मुसाफिर यात्री वाहनों का टकटकी लगाए इंतजार कर रहा है। सरकार जिस एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम लगाने पर अड़ी है वह सुरक्षा की दृष्टि से उपयुक्त तो है लेकिन उत्तराखंड में उसे लगाने की कोई व्यवस्था नहीं है।

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फिर भी सरकार की तरफ से इस समस्या के समाधान की कोई कोशिश नहीं हुई। परिणाम यह हुआ कि सोमवार से कुमाऊं में भी हड़ताल शुरू हो रही है। सवाल यही है कि जब यह व्यवस्था वर्ष 2007 में लागू हो गई थी तो अभी तक राज्य सरकार क्या करती रही।
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दरअसल, यह व्यवस्था केवल पहाड़ी क्षेत्र के लिए हैं। सरकार ने भी बगैर किसी नोटिस के डेडलाइन तय कर दी और मैक्सी कैब यूनियन भी बगैर कोई नोटिस दिए हड़ताल पर चली गई।

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ऐसे में जब खुद शासन मानता है कि एएलबीएस (एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम) लगाने की व्यवस्था राज्य में नहीं है, तो फिर टैक्सी मालिक कहां लगवाए इसका इंतजाम भी सरकार ने करना जरूरी नहीं समझा।

हालांकि अब पहाड़ के लिए निर्मित हो रही सभी गाड़ियों में यह सिस्टम लगाकर भेजा जा रहा है, लेकिन यहां जो 35-40 हजार टैक्सी चल रही है उनका क्या होगा। यह भी सच है कि इस समस्या का समाधान तभी निकलेगा जब इस मामले में सरकार की भागीदारी होगी।

सरकार दे सकती है मोहलत
सूत्रों की माने तो सरकार टैक्सी वाहन स्वामियों को एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम लगवाने में कुछ दिनों की मोहलत दे सकती है। क्योंकि सरकार को पता है कि खुद उसके पास भी कोई रास्ता नहीं है।


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सूत्र बताते है कि शासन में कल इस मामले को लेकर सीएम ने बैठक भी बुलाई है। माना जा रहा है कि छह महीने का रिलेक्सेशन दिया जा सकता है। इस प्रस्ताव को आगामी सात जनवरी की कैबिनेट में भी लाने की संभावना है।

कुछ सवाल और भी है
सरकार ने अभी दूसरे पक्ष पर गौर नहीं किया। पहाड़ में चिकित्सा के क्षेत्र में संचालित हो रही एम्बुलेंस 108 में यह सिस्टम नहीं है। पुलिस वाहनों से लेकर सरकारी महकमो के वाहन भी इस सिस्टम के बगैर ही पहाड़ में दौड़ रहे हैं।

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उन्हें लेकर सरकार ने कोई एक्सरसाइज नहीं की। इसके अलावा पर्यटन सीजन में दिल्ली व अन्य प्रदेशों से आने वाले वाहनों में यह सिस्टम नहीं होगा उन्हें पहाड़ जाने से कैसे रोका जाएगा।

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