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सरकार से छठी वार्ता विफल, हड़ताल रहेगा जारी
अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 29 Oct 2013 09:58 PM IST
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उत्तराखंड के राज्य कर्मचारियों और शासन की छठी बार की वार्ता के बाद भी गतिरोध बना हुआ है। बातचीत से कर्मचारी पूरी तरह से संतुष्ट नहीं हैं, हालांकि बर्फ कुछ हद तक पिघली भी है।
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बुधवार को तालाबंदी पर फैसला
बुधवार को एक बार फिर दोनों पक्षों में बातचीत होगी। कर्मचारियों की हड़ताल जारी है पर जरूरी सेवाओं और तालाबंदी पर फैसला बुधवार को आम सभा के बाद होगा। वहीं, इस बैठक के बाद भी मुख्य सचिव सुभाष कुमार और वित्त विभाग के अधिकारियों के बीच बातचीत हुई।
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एक माह से सैद्धांतिक सहमति
मंगलवार को हुई शासन और कर्मचारियों के बीच बातचीत दो मुख्य बिंदुओं पर आकर अटक गई। राज्य कर्मचारियों की पहली मांग पर पिछले एक माह से शासन सैद्धांतिक सहमति जताता आ रहा है। मंगलवार को सचिवालय में हुई बैठक में भी कहा गया कि कर्मचारियों को तीन अनिवार्य पदोन्नतियां वर्तमान तिथि से दी जाएंगी। कर्मचारी इस पर सहमत नही हैं। वहीं 2800 ग्रेड पे समाप्त करने की मांग पर शासन ने बुधवार तक का समय मांगा है।
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कर्मचारी पूरी तरह से संतुष्ट नही
मंगलवार को हुई बातचीत से कर्मचारी पूरी तरह से संतुष्ट नही है। ये शासनादेश न मिलने तक हड़ताल जारी रखने पर आमादा हैं। ऐसे में बुधवार को भी कर्मचारी हड़ताल पर रहेंगे। गनीमत यह है कि इनकी ओर से आवश्यक सेवाओं को ठप करने और तालाबंदी से फिलहाल परहेज किया गया है।
इसके लिए बुधवार को आम सभा होगी और इसमें फैसला होगा। यह बहुत कुछ बुधवार को शासन से होने वाली बातचीत पर भी निर्भर करेगा। प्रमुख सचिव वित्त राकेश शर्मा के मुताबिक बीच का रास्ता निकालने की कोशिश हो रही है। बुधवार को एक बार फिर से बातचीत होगी।
दूसरी ओर साकेत बहुगुणा मंगलवार को भी कर्मचारियों की हड़ताल को लेकर सक्रिय रहे। साकेत ने राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष प्रहलाद सिंह से दोपहर बाद करीब ढाई बजे बात की। साकेत ने कर्मचारियों से नरम रुख रखने की अपील की। कर्मचारियों की मांग को लेकर शासन रात तक उलझा रहा। मुख्य सचिव सुभाष कुमार और वित्त विभाग के अधिकारियों के बीच इस कर्मचारियों की मांगों पर बातचीत हुई। कोई सर्वमान्य हल फिलहाल नहीं निकल पाया है।
कहां अटका मामला
1.कर्मचारियों की मांग-राज्य कर्मचारियों को सेवाकाल में अनिवार्य रूप से तीन पदोन्नतियां दी जाएं। पदोन्नति की यह अनिवार्यता एक सितंबर 2008 से लागू की जाए। शासन चाहे तो 2012 तक नोशनल पदोन्नति दे सकता है। कर्मचारी एरियर की मांग नहीं करेगें।
शासन का पक्ष- जहां पदोन्नति नही है वहां पदोन्नयन ग्रेड पे दिया जाएगा। यह व्यवस्था वर्तमान वर्ष से लागू होगी।
2. ग्रेड वेतन वर्ग- 2 के विभिन्न कार्मिकों को 2800 ग्रेड पे केस्थान पर मिनिस्ट्रीयल की ही तरह 4200 ग्रेड पे दिया जाए। मिनिस्ट्रीयल की इस मांग को पूरा करते समय शासन ने माना था कि 7500 फील्ड कर्मचारियों की ओर से भी यह मांग उठेगी।
शासन का पक्ष-मांग विचार किए जाने की जरूरत है। बुधवार को तीन बजे इस पर फिर बातचीत होगी।