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तनाव सिर्फ बीमारी नहीं, सकारात्मक भी हैं प्रभाव : डॉ. निशा
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वर्तमान जीवनशैली में होने वाली घटनाओं और कार्यशैली के बोझ को सकारात्मक ढंग से लेंगे तो तनाव नहीं होगा। तनाव सिर्फ बीमारी नहीं, इसके सकारात्मक प्रभाव भी हैं। बशर्ते इसे सही समय पर पहचान लिया जाए। ये बातें अमर उजाला की ओर से मानसिक स्वास्थ्य पर आयोजित कार्यशाला में डाॅ. निशा सिंगला ने कहीं।
सोमवार को अमर उजाला के कार्यालय में आयोजित कार्यशाला में गांधी शताब्दी अस्पताल की मनोचिकित्सक डॉ. निशा सिंगला ने कहा कि शुरुआती दौर में तनाव से अपने काम को सटीकता से करने का प्राेत्साहन भी मिलता है, लेकिन अगर यह हावी हो गया तो तमाम तरह की बीमारियां भी लेकर आता है। आमतौर पर ये बीमारियां ऐसी होती हैं, जिनके निदान के लिए व्यक्ति सबसे पहले सामान्य चिकित्सक से उपचार करा शारीरिक पीड़ा को दूर करने की मांग करता है, लेकिन समय से यदि मनोचिकित्सक की सलाह ली जाए तो पता चलेगा कि शरीर की यह पीड़ा तनाव से ही पैदा हुई है। आमतौर पर तनाव की कई वजहें देखने को मिलती हैं। इसका एक प्रमुख कारण मोबाइल फोन का अधिक इस्तेमाल भी है।
इससे लोगों के नींद का चक्र अव्यवस्थित हो जाता है और उन्हें मानसिक रूप से परेशान होना पड़ता है। ऐसे में लोगों को अपनी दिनचर्या व्यवस्थित करने के अलावा सकारात्मक विचारों को आत्मसात करना चाहिए। उन्होंने लोगों को तनाव में हताश हाेने के बजाय, इससे प्रोत्साहन हासिल करने की भी सलाह दी। उन्होंने कहा कि ध्यान लगाकर और अपने शौक को पूरा कर तनाव से मुक्त रहा जा सकता है। इस दौरान मनोचिकित्सक डॉ. अंशुमान वासुदेव ने भी मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के उपाय समझाए।
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सोमवार को अमर उजाला के कार्यालय में आयोजित कार्यशाला में गांधी शताब्दी अस्पताल की मनोचिकित्सक डॉ. निशा सिंगला ने कहा कि शुरुआती दौर में तनाव से अपने काम को सटीकता से करने का प्राेत्साहन भी मिलता है, लेकिन अगर यह हावी हो गया तो तमाम तरह की बीमारियां भी लेकर आता है। आमतौर पर ये बीमारियां ऐसी होती हैं, जिनके निदान के लिए व्यक्ति सबसे पहले सामान्य चिकित्सक से उपचार करा शारीरिक पीड़ा को दूर करने की मांग करता है, लेकिन समय से यदि मनोचिकित्सक की सलाह ली जाए तो पता चलेगा कि शरीर की यह पीड़ा तनाव से ही पैदा हुई है। आमतौर पर तनाव की कई वजहें देखने को मिलती हैं। इसका एक प्रमुख कारण मोबाइल फोन का अधिक इस्तेमाल भी है।
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इससे लोगों के नींद का चक्र अव्यवस्थित हो जाता है और उन्हें मानसिक रूप से परेशान होना पड़ता है। ऐसे में लोगों को अपनी दिनचर्या व्यवस्थित करने के अलावा सकारात्मक विचारों को आत्मसात करना चाहिए। उन्होंने लोगों को तनाव में हताश हाेने के बजाय, इससे प्रोत्साहन हासिल करने की भी सलाह दी। उन्होंने कहा कि ध्यान लगाकर और अपने शौक को पूरा कर तनाव से मुक्त रहा जा सकता है। इस दौरान मनोचिकित्सक डॉ. अंशुमान वासुदेव ने भी मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के उपाय समझाए।
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