फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   story on indian god

'भारत में जो अवतार नहीं वे भी पूजे जाते हैं'

Fri, 27 Jun 2014 05:14 PM IST
कौशल सिखौला/अमर उजाला, हरिद्वार
कौशल सिखौला/अमर उजाला, हरिद्वार Updated Fri, 27 Jun 2014 05:14 PM IST
विज्ञापन
story on indian god

यह देश आस्था और भावनाओं का देश है। यहां अवतार भी पूजे जाते हैं और वे भी जो अवतार नहीं हैं। देश के कई भागों में सड़क किनारे बनीं मड़ियां मंदिरों में बदल गई हैं।

विज्ञापन


स्थानीय देवताओं के प्राचीन मंदिर जगह-जगह मौजूद हैं। गोगावीर और शीतला के मंदिरों की तो उत्तर भारत में बाढ़ ही आ गई है।

राजस्थान, यूपी, हरियाणा और उत्तराखंड के मैदानी भागों में गोगावीर के कई मंदिर हैं। हरिद्वार में भी गोगावीर का मंदिर है।

संतोषी माता का विवरण पुराणों में नहीं

story on indian god

शीतला माता की याद आमतौर पर चैत्र और अश्विन के महीनों में आती हैं। शीतला माता के मंदिर जगह-जगह विद्यमान हैं। हरिद्वार में भी मां के कईं सिद्ध मंदिर हैं।

संतोषी माता का अधिक विवरण पुराणों में नहीं मिलता। यद्यपि कुछ विद्वानों का मानना है कि स्कंद पुराण के केदार खंड में वर्णित मां कामपूर्णेश्वरी ही संतोषी माता हैं।

70 के दशक में बनी फिल्म जय संतोषी माता के बाद संतोषी माता के कई मंदिर देश के विभिन्न भागों में बनें।

विज्ञापन
विज्ञापन

मजारों पर चढ़ता है प्रसाद

story on indian god

पंचपुरी के ज्वालापुर में मां संतोषी का 100 वर्ष से अधिक पुराना मंदिर मौजूद है। ये सभी भगवान विष्णु के अवतार नहीं थे। फिर भी इनके मंदिर देश के विभिन्न भागों में बनते रहे।

ऐसा कोई राज्य नहीं जहां मजारों पर प्रसाद नहीं चढ़ाया जाता हो। मजारों पर मुसलमानों के साथ-साथ हिंदू भी प्रसाद चढ़ाते हैं। साईं बाबा अथवा गोगावीर की जात हिंदू थी या मुसलमान, यह कोई नहीं पूछता।

शंकराचार्य ने याद दिया तो लोगों को पता चला। देश में स्थानीय देवताओं के हजारों मंदिर नगर-नगर बने हुए हैं। वे भी कोई अवतार नहीं थे। देश की गंगा-जमुनी संस्कृति कायम रहे, इसका प्रयत्न तो अतीत से होता आया है।

विज्ञापन

भारत माता का अनोखा मंदिर

story on indian god

धर्मनगरी में भारत माता का नौ मंजिल ऊंचा भव्य मंदिर मौजूद है। इस मंदिर में साईं भी हैं और अशफाक भी। भगत सिंह भी है और अब्दुल हमीद भी। ब्रह्मा, विष्णु, महेश भी है और सूर, तुलसी, कबीर और रैदास भी।

मंदिर की स्थापना स्वयं निवृत्त शंकराचार्य स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी ने कराई जो आद्य शंकराचार्य परंपरा के दसनामी संन्यासियों के संत हैं।

इस मंदिर में गरीबदासीय, बौद्ध, जैन, घीसापंथी आदि सभी संप्रदायों के धर्म गुरुओं की प्रतिमाएं विद्यमान हैं। किसी की पूजा से किसी को कभी परहेज नहीं रहा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed