{"_id":"66cce7d26d34c56fd10f2ef5","slug":"stf-has-arrested-three-youths-who-were-masterminds-of-cyber-dehradun-news-c-5-1-drn1030-486563-2024-08-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Dehradun News: साइबर ठगी के मास्टरमाइंड तीन आरोपियों को एसटीएफ ने दिल्ली से दबोचा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Dehradun News: साइबर ठगी के मास्टरमाइंड तीन आरोपियों को एसटीएफ ने दिल्ली से दबोचा
विज्ञापन
Iदून के एक युवक से विदेश में नौकरी के नाम पर ठगे थे 23 लाख, दुबई, चीन और पाकिस्तान से जुड़े हैं तार
I
I
I
Iक्रिप्टो करेंसी के जरिए रकम का किया जाता है आपस में लेनदेनI
साइबर ठगी के मास्टरमाइंड तीन युवकों को एसटीएफ ने दिल्ली से गिरफ्तार किया है। इनमें दो सगे भाई हैं। तीनों आरोपियों ने अपने साथियों के साथ मिलकर दून निवासी एक युवक को विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर 23 लाख रुपये ठगे थे। आरोपियों के तार दुबई, चीन और पाकिस्तान से जुड़े बताए जा रहे हैं। आरोपी धन का लेनदेन क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से करते थे। आरोपियों के अन्य साथियों की तलाश भी की जा रही है।
एसएसपी एसटीएफ आयुष अग्रवाल ने बताया कि मोहब्बेवाला निवासी एक युवक ने साइबर थाने को शिकायत की थी। बताया था कि पिछले साल उसने नौकरी डॉट कॉम पर नौकरी के लिए अपना सीवी अपलोड किया था। इसे देखकर अज्ञात साइबर ठगों ने उनसे संपर्क किया। उन्होंने युवक से रजिस्ट्रेशन के नाम पर 14800 रुपये लिए। इसके बाद युवक का स्काइप एप के माध्यम से इंटरव्यू भी लिया। ठगों ने उन्हें चयन की बात कहते हुए दस्तावेज सत्यापन, जॉब सिक्योरिटी, फास्ट ट्रैक वीजा और आइलेट्स एग्जाम के नाम पर 22 लाख रुपये से ज्यादा अपने खातों में ट्रांसफर कराए। कुछ दिन बाद उन्हें कॉल आई कि उनका आइलेट्स एग्जाम के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है।
लिहाजा अब तीन महीने बाद फिर से प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके बाद संपर्क बंद कर दिया। साइबर थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की और आरोपियों के खातों की जांच की गई। सोमवार को दिल्ली जनकपुरी वेस्ट इलाके से से तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपियों ने अपने नाम अलमास आजम, अनस आजम निवासी अशरफाबाग जाजमऊ नियर शिवांश टेनरी थाना चकैरी कानपुर उत्तर प्रदेश और सचिन अग्रवाल सी-34 सेकंड फ्लोर कृष्णा पार्क विकासपुरी दिल्ली बताए हैं। आरोपियों के पास से छह मोबाइल फोन, 42 बैंक पासबुक और 16 सिम कार्ड बरामद हुए हैं।
विज्ञापन
Iऐसे करते हैं ठगीI
फर्जी आईडी, मोबाइल नंबर, व्हाट्सएप, टेलीग्राम और जानी-मानी कंपनियों से मिलते-जुलते ईमेल पते का उपयोग कर नौकरी चाहने वालों से संपर्क करते हैं। पीड़ितों से ठगी की गई धनराशि को भोले-भाले लोगों के बैंक खाता विवरण का दुरुपयोग करके प्राप्त किया जाता है। वे लोगों के ओरिजिनल आधार कार्ड, पैन कार्ड आदि लेकर फर्जी बैंक खाते (म्यूल अकाउंट) खोलते हैं, जहां यह पैसा जमा किया जाता है। इन खातों के दस्तावेज और एसएमएस अलर्ट नंबरों को फिजिकली दुबई भेज दिया जाता है।
Iक्रिप्टो करेंसी यूएसडीटी में करते हैं लेनदेनI
आरोपी एक दूसरे से लेनदेन क्रिप्टो करेंसी यूएसडीटी में करते हैं। दुबई का मास्टरमाइंड (पाकिस्तानी एजेंटों) भारतीय सहयोगी को शामिल करता है, जो पूरे बैंक खाते के किट प्राप्त करते हैं। वहीं, चीनी एजेंट व्हाट्सएप और टेलीग्राम के माध्यम से क्रिप्टो भुगतान और वास्तविक समय में यूपीआई विवरणों के लिए निर्देश देते हैं। गिरोह के अन्य सदस्य बिनांस और ट्रस्ट वॉलेट जैसी क्रिप्टो प्लेटफार्म से यूएसडीटी खरीदते हैं। यूएसडीटी को बिनांस वॉलेट में ट्रांसफर किया जाता है। विदेशी ठग इसे 90 रुपये प्रति यूएसडीटी के बजाय 104 रुपये प्रति यूएसडीटी के भाव से भारतीय रुपये भेजते हैं। मुनाफे को आपस में बांटा जाता है, जिसमें सात रुपये सचिन को और बाकी सात रुपये आजम को दिया जाता है। आजम भाइयों को प्रत्येक फर्जी खाते के लिए अतिरिक्त कमीशन भी मिलता है।
विज्ञापन
I
I
I
Iक्रिप्टो करेंसी के जरिए रकम का किया जाता है आपस में लेनदेनI
साइबर ठगी के मास्टरमाइंड तीन युवकों को एसटीएफ ने दिल्ली से गिरफ्तार किया है। इनमें दो सगे भाई हैं। तीनों आरोपियों ने अपने साथियों के साथ मिलकर दून निवासी एक युवक को विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर 23 लाख रुपये ठगे थे। आरोपियों के तार दुबई, चीन और पाकिस्तान से जुड़े बताए जा रहे हैं। आरोपी धन का लेनदेन क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से करते थे। आरोपियों के अन्य साथियों की तलाश भी की जा रही है।
एसएसपी एसटीएफ आयुष अग्रवाल ने बताया कि मोहब्बेवाला निवासी एक युवक ने साइबर थाने को शिकायत की थी। बताया था कि पिछले साल उसने नौकरी डॉट कॉम पर नौकरी के लिए अपना सीवी अपलोड किया था। इसे देखकर अज्ञात साइबर ठगों ने उनसे संपर्क किया। उन्होंने युवक से रजिस्ट्रेशन के नाम पर 14800 रुपये लिए। इसके बाद युवक का स्काइप एप के माध्यम से इंटरव्यू भी लिया। ठगों ने उन्हें चयन की बात कहते हुए दस्तावेज सत्यापन, जॉब सिक्योरिटी, फास्ट ट्रैक वीजा और आइलेट्स एग्जाम के नाम पर 22 लाख रुपये से ज्यादा अपने खातों में ट्रांसफर कराए। कुछ दिन बाद उन्हें कॉल आई कि उनका आइलेट्स एग्जाम के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है।
विज्ञापन
लिहाजा अब तीन महीने बाद फिर से प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके बाद संपर्क बंद कर दिया। साइबर थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की और आरोपियों के खातों की जांच की गई। सोमवार को दिल्ली जनकपुरी वेस्ट इलाके से से तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपियों ने अपने नाम अलमास आजम, अनस आजम निवासी अशरफाबाग जाजमऊ नियर शिवांश टेनरी थाना चकैरी कानपुर उत्तर प्रदेश और सचिन अग्रवाल सी-34 सेकंड फ्लोर कृष्णा पार्क विकासपुरी दिल्ली बताए हैं। आरोपियों के पास से छह मोबाइल फोन, 42 बैंक पासबुक और 16 सिम कार्ड बरामद हुए हैं।
विज्ञापन
Iऐसे करते हैं ठगीI
फर्जी आईडी, मोबाइल नंबर, व्हाट्सएप, टेलीग्राम और जानी-मानी कंपनियों से मिलते-जुलते ईमेल पते का उपयोग कर नौकरी चाहने वालों से संपर्क करते हैं। पीड़ितों से ठगी की गई धनराशि को भोले-भाले लोगों के बैंक खाता विवरण का दुरुपयोग करके प्राप्त किया जाता है। वे लोगों के ओरिजिनल आधार कार्ड, पैन कार्ड आदि लेकर फर्जी बैंक खाते (म्यूल अकाउंट) खोलते हैं, जहां यह पैसा जमा किया जाता है। इन खातों के दस्तावेज और एसएमएस अलर्ट नंबरों को फिजिकली दुबई भेज दिया जाता है।
Iक्रिप्टो करेंसी यूएसडीटी में करते हैं लेनदेनI
आरोपी एक दूसरे से लेनदेन क्रिप्टो करेंसी यूएसडीटी में करते हैं। दुबई का मास्टरमाइंड (पाकिस्तानी एजेंटों) भारतीय सहयोगी को शामिल करता है, जो पूरे बैंक खाते के किट प्राप्त करते हैं। वहीं, चीनी एजेंट व्हाट्सएप और टेलीग्राम के माध्यम से क्रिप्टो भुगतान और वास्तविक समय में यूपीआई विवरणों के लिए निर्देश देते हैं। गिरोह के अन्य सदस्य बिनांस और ट्रस्ट वॉलेट जैसी क्रिप्टो प्लेटफार्म से यूएसडीटी खरीदते हैं। यूएसडीटी को बिनांस वॉलेट में ट्रांसफर किया जाता है। विदेशी ठग इसे 90 रुपये प्रति यूएसडीटी के बजाय 104 रुपये प्रति यूएसडीटी के भाव से भारतीय रुपये भेजते हैं। मुनाफे को आपस में बांटा जाता है, जिसमें सात रुपये सचिन को और बाकी सात रुपये आजम को दिया जाता है। आजम भाइयों को प्रत्येक फर्जी खाते के लिए अतिरिक्त कमीशन भी मिलता है।