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SSP नैनीताल स्वीटी को मिली हाईकोर्ट से राहत

Wed, 23 Dec 2015 12:07 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, नैनीताल
ब्यूरो / अमर उजाला, नैनीताल Updated Wed, 23 Dec 2015 12:07 PM IST
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SSP nainital get relief from high court.

हाईकोर्ट में एसएसपी नैनीताल स्वीटी अग्रवाल की याचिका पर उत्तराखंड सरकार की ओर से राज्यपाल के आदेश पर उनकी पत्रावली में रखे गए मिसकंडक्ट संबंधी पत्र को हटा लेने, इसे दंड न मानने तथा इस पत्र का उनके सेवाकाल में कोई संज्ञान न लेने के सरकार के आश्वासन के बाद याचिका निस्तारित हो गई।

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राज्यपाल के आदेश को किसी अधिकारी की ओर से हाईकोर्ट में चुनौती देने के प्रदेश के पहले मामले की मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की संयुक्त खंडपीठ के समक्ष सुनवाई हुई।
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मामले के अनुसार हरिद्वार विधानसभा के उप चुनाव का परिणाम घोषित होने के समय विधायक ममता राकेश को प्रशासन की ओर से प्रमाण पत्र देते समय तत्कालीन एसएसपी हरिद्वार स्वीटी की फोटो भी विजयी प्रत्याशी के साथ समाचार पत्र में  प्रकाशित हुई थी जिसका संज्ञान लेकर राज्यपाल केके पॉल ने मुख्य सचिव को इसे मिसकंडक्ट मानते हुए उन पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
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इस पर डीजीपी ने तथ्यों की पड़ताल के बाद जवाब दिया कि कार्यक्रम में अन्य अधिकारी भी थे और यह मिसकंडक्ट नहीं है। गत 22 जून को राज्यपाल के इस प्रकरण पर डीजीपी से अप्रसन्नता जाहिर करने के निर्देश पर डीजीपी की ओर से खेद भी जता दिया गया था।

इसके बाद पुन: राज्यपाल ने अपनी अप्रसन्नता को याचिकाकर्ता के सर्विस रिकार्ड तथा व्यक्तिगत पत्रावली में रखने के आदेश दिए थे जिसे स्वीटी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

स्वीटी के अधिवक्ता विपुल शर्मा ने कोर्ट में तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से विभिन्न प्रकरणों में राज्यपाल की शक्तियां निर्धारित की गई हैं जिसके अनुसार वह सीधे सरकार को प्रशासनिक आदेश नहीं दे सकते हैं तथा चुनाव के दौरान स्वीटी चुनाव आयोग के अधीन कार्यरत थीं तथा किसी भी मिसकंडक्ट का संज्ञान लेने का अधिकार केवल चुनाव आयोग को था और अखिल भारतीय सेवा एवं अनुशासनात्मक नियमावली के तहत इस प्रकार का आदेश जारी नहीं किया जा सकता है।


बहस के बाद सरकार ने हाईकोर्ट में कहा कि पत्रावली से मिसकंडक्ट संबंधी पत्र को हटा दिया जाएगा, इस प्रकरण को  स्वीटी के खिलाफ दंड नहीं माना जाएगा तथा उनकी सेवा के दौरान इस पत्र को किसी भी प्रकार से उनके विरुद्घ उपयोग में नहीं लाया जाएगा। सरकार के इस आश्वासन के बाद याचिका निस्तारित हो गई।

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